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विनेश फोगाट केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को फटकार
विनेश फोगाट केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को फटकार
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हाई कोर्ट : विनेश फोगाट केस में केंद्र को विशेषज्ञ समिति बनाने के निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने विनेश फोगाट को एशियन गेम्स चयन ट्रायल से बाहर किए जाने पर भारतीय कुश्ती महासंघ को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि मातृत्व किसी खिलाड़ी के करियर में बाधा नहीं बनना चाहिए और मामले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने के निर्देश दिए हैं।

कीर्तिमान नेटवर्क
22 May 2026, 04:48 PM
📍 नई दिल्ली
विनेश फोगाट से जुड़े मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं और एशियन गेम्स चयन ट्रायल से बाहर किए जाने के मामले पर गंभीर नाराजगी जताते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के रवैये पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि खिलाड़ियों और फेडरेशन के बीच चल रहे विवाद का असर खेल और खिलाड़ियों के करियर पर नहीं पड़ना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि आखिर भारतीय कुश्ती को इस विवाद की कीमत क्यों चुकानी पड़े। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

विवाद का जड़ 

मामला तब शुरू हुआ जब भारतीय कुश्ती महासंघ ने एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल के लिए नई पात्रता शर्तें लागू कीं। इन नियमों के तहत केवल हालिया राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ही चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई। विनेश फोगाट, जो मातृत्व अवकाश के बाद कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं, इन नियमों के कारण ट्रायल से बाहर हो गईं। महासंघ ने उन्हें घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद विनेश फोगाट ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और चयन नीति तथा भारतीय कुश्ती महासंघ के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने अदालत से मांग की कि उन्हें चयन ट्रायल में हिस्सा लेने का मौका दिया जाए और उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

हाई कोर्ट का फैसला 

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि “मातृत्व हमारे समाज में सम्मान और गर्व की बात मानी जाती है। इसे किसी खिलाड़ी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने यह भी कहा कि चयन नियमों में अचानक बदलाव कई सवाल खड़े करता है। अदालत की टिप्पणी से साफ संकेत मिला कि उसे यह बदलाव किसी विशेष खिलाड़ी को बाहर रखने की कोशिश जैसा प्रतीत हो रहा है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह एक विशेषज्ञ समिति गठित करे, जो पूरे मामले की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि विनेश फोगाट को चयन प्रक्रिया में निष्पक्ष अवसर मिले। अदालत ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों के करियर और देश के खेल हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अंतरिम राहत देने से किया था इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले विनेश फोगाट को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि बिना दूसरी पक्ष की दलील सुने सीधे उन्हें ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। हालांकि ताजा सुनवाई में अदालत का रुख काफी सख्त नजर आया। कोर्ट की टिप्पणियों को विनेश फोगाट के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिला है कि अदालत खिलाड़ियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने के पक्ष में है।

मातृत्व और महिला खिलाड़ियों के अधिकार पर बहस

इस मामले ने भारतीय खेल जगत में मातृत्व अवकाश और महिला खिलाड़ियों की वापसी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी खिलाड़ी का मां बनना उसके करियर के खिलाफ नहीं जाना चाहिए।  यह मामला भविष्य में महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और खेल संघों की नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। कई पूर्व खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों ने भी कहा है कि महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व के बाद वापसी को आसान और सम्मानजनक बनाया जाना चाहिए। खेल जगत में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या भारतीय खेल संस्थाओं के पास महिला खिलाड़ियों की वापसी और मातृत्व अवकाश को लेकर स्पष्ट और संवेदनशील नीति है या नहीं।

विवादों में विनेश और WFI

विनेश फोगाट पिछले कुछ वर्षों से भारतीय कुश्ती महासंघ के साथ विवादों में रही हैं। वर्ष 2023 में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के आंदोलन में विनेश फोगाट प्रमुख चेहरों में शामिल थीं। उस आंदोलन ने पूरे देश में बड़ा राजनीतिक और खेल विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद भारतीय कुश्ती महासंघ लगातार विवादों में बना रहा। कई बार चयन प्रक्रिया, प्रशासनिक फैसलों और खिलाड़ियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

पेरिस ओलंपिक के बाद बड़ा फैसला

विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक 2024 में अयोग्य घोषित किए जाने के बाद बड़ा झटका लगा था। इसके बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा भी कर दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने वापसी का फैसला लिया और अब उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी माना जा रहा है। उनकी वापसी को भारतीय महिला कुश्ती के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि विनेश जैसी अनुभवी खिलाड़ी युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा हैं और उन्हें निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।

खेल जगत

दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब सबकी नजर केंद्र सरकार और भारतीय कुश्ती महासंघ पर टिकी हुई है। विशेषज्ञ समिति के गठन और उसके फैसले से यह तय होगा कि विनेश फोगाट एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा ले पाएंगी या नहीं। इस पूरे मामले ने भारतीय खेल प्रशासन, महिला खिलाड़ियों के अधिकार और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला भारतीय खेल जगत में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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