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निजी स्कूलों में किताबों की कमी को लेकर चिंता
निजी स्कूलों में किताबों की कमी को लेकर चिंता
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बढ़ी चिंता : निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली पाठ्यपुस्तकें

छत्तीसगढ़ में 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन निजी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर निजी स्कूलों के लिए जल्द पुस्तक वितरण शेड्यूल जारी करने और पर्याप्त किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
08 Jun 2026, 11:57 AM
रायपुर

 प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। स्कूलों के दोबारा खुलने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन निजी स्कूलों के सामने पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। समय पर किताबें नहीं मिलने की आशंका से निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति जल्द शुरू की जाए तथा वितरण का स्पष्ट कार्यक्रम जारी किया जाए, ताकि नए सत्र की पढ़ाई बिना किसी बाधा के प्रारंभ हो सके।

सरकारी स्कूलों में वितरण शुरू

एसोसिएशन का कहना है कि पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा सरकारी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति का कार्य शुरू कर दिया गया है। कई जिलों में सरकारी विद्यालयों तक पुस्तकें पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन निजी स्कूलों के लिए अब तक कोई निर्धारित शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। इससे हजारों विद्यार्थियों के सामने सत्र की शुरुआत में किताबों की कमी की स्थिति बन सकती है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यदि जल्द पुस्तक वितरण नहीं हुआ तो स्कूल खुलने से पहले विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा। पुस्तकें मिलने के बाद उनकी पैकिंग, वितरण और अभिभावकों तक पहुंचाने में भी समय लगता है। ऐसे में देरी होने पर शुरुआती दिनों में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

भेदभावपूर्ण रवैये का लगाया आरोप

एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग पर निजी स्कूलों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में निजी स्कूल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और लाखों विद्यार्थी इनमें अध्ययनरत हैं। इसलिए पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए।

नए सत्र को लेकर अभिभावक पहले ही यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और अन्य शैक्षणिक सामग्री की तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे में किताबों की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कई अभिभावकों का कहना है कि समय पर किताबें नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई की गति प्रभावित होगी।

शिक्षा सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि निजी स्कूलों के लिए शीघ्र पुस्तक वितरण कार्यक्रम घोषित किया जाए और सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित हो सके। शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक निजी स्कूलों के लिए वितरण तिथि को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि स्कूल प्रबंधन को उम्मीद है कि विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए विभाग जल्द निर्णय लेगा और किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, जिससे नए सत्र की शुरुआत बिना किसी व्यवधान के हो सके।
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