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India-Pakistan dispute over the Indus Waters Treaty
India-Pakistan dispute over the Indus Waters Treaty
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Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि विवाद, हेग अदालत के फैसले पर भारत सख्त, पाकिस्तान की बातचीत की अपील बेअसर

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद बढ़ गया है। PCA के आदेश को भारत ने खारिज किया, जबकि पाकिस्तान ने संधि को बाध्यकारी बताते हुए भारत से बातचीत की अपील की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Sep 2026, 03:33 PM · अपडेट: 19 Oct 2026, 04:16 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Indus Waters Treaty: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा स्थगित की गई सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनातनी और गहरा गई है। नीदरलैंड्स के हेग स्थित 'स्थायी मध्यस्थता न्यायालय' (PCA) के ताजा आदेश के बाद जहाँ पाकिस्तान ने भारत से बातचीत की मेज पर आने का आग्रह किया है, वहीं भारत ने इस अदालत को पूरी तरह 'अवैध' करार देते हुए इसके फैसले को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि हेग स्थित मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि आज भी पूरी तरह से लागू और बाध्यकारी है। 

फैसले को लागू करने कूटनीतिक रास्ते 

अंद्राबी के मुताबिक, अदालत ने माना है कि भारत द्वारा संधि को निलंबित करने का कोई भी आधार कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस फैसले को पूर्ण रूप से लागू कराने के लिए तमाम कानूनी और कूटनीतिक रास्ते अपनाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह इस संधि के दायरे में रहकर पाकिस्तान के साथ रचनात्मक बातचीत शुरू करे। 

अदालत के फैसले को किया सिरे से खारिज 

दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने मध्यस्थता अदालत के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत सरकार ने कड़े शब्दों में बयान जारी करते हुए कहा कि विश्व बैंक द्वारा इस तथाकथित अदालत का गठन सिंधु जल संधि के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करके किया गया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया:

  • अस्तित्व पर सवाल: भारत ने इस 'अवैध रूप से गठित' निकाय को कभी स्वीकार नहीं किया है और न ही कभी इसके समक्ष पेश हुआ है।

  • संप्रभुता से समझौता नहीं: इस गैर-कानूनी अदालत को भारत के संप्रभु फैसलों या भारत में चल रही विकास परियोजनाओं पर कोई भी आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

  • असर शून्य: इस तरह के किसी भी तथाकथित फैसले का भारत की जल परियोजनाओं पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ेगा।

हेग मध्यस्थता न्यायालय का दरवाजा खटखटाया 

इस विवाद की जड़ें पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले से जुड़ी हैं। इस बर्बर हमले में 26 आम नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल था। भारत के इस सख्त कदम से बौखलाए पाकिस्तान ने इस साल मार्च में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 

अदालत ने सर्वसम्मति से सुनाया फैसला 

पाकिस्तान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि भारत द्वारा संधि को निलंबित या समाप्त करने के लिए दिए गए तर्क पर्याप्त नहीं हैं और भारत को संधि की शर्तों का पालन करना होगा। हालाँकि, भारत ने शुरू से ही इस पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक और एकतरफा बताते हुए इसका बहिष्कार किया है और स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और कूटनीतिक जिम्मेदारियाँ एक साथ नहीं चल सकतीं।
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