गौशालाओं का निरीक्षण : पशुओं की देखभाल और चारा व्यवस्था पर दिए दिशा-निर्देश
बागबाहरा विकासखण्ड की विद्यादेवी और टेमरी गौशाला का उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने निरीक्षण किया। उन्होंने बारिश के मौसम में गौवंश की सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर रख-रखाव को लेकर संचालकों को दिशा-निर्देश दिए। टेमरी गौशाला को भविष्य में प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
कीर्तिमान डेस्क
17 Jul 2026, 08:39 AM
महासमुंद
विकासखण्ड बागबाहरा के अंतर्गत उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बुधवार को विद्यादेवी गौशाला और टेमरी गौशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वर्षा ऋतु में पशुओं की देखभाल, गौशाला परिसर को सूखा रखने और पशुओं को गीले स्थानों व पानी भरे गड्ढों से बचाने के लिए आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश गौशाला संचालकों को दिए।
निरीक्षण के दौरान विद्यादेवी गौशाला के अध्यक्ष गणेश अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में गौशाला में 345 गौवंशीय पशु रखे गए हैं। सभी पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। गौशाला में पशुओं के लिए 7 शेड बनाए गए हैं, जहां उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है।
टेमरी गौशाला में निरीक्षणदो माह के चारे का भंडारण
गौशाला प्रबंधन द्वारा आने वाले दो माह के लिए पशुओं के चारे और दाने का पर्याप्त भंडारण किया गया है, ताकि वर्षा ऋतु के दौरान पशुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ग्राम टेमरी स्थित हर्ष सेवा समिति द्वारा संचालित गौशाला के संचालक गुरबक्श सिंह गांधी ने बताया कि गौशाला में 3 शेड बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 300 पशुओं को रखने की है।
वर्तमान में यहां 250 गौवंशीय पशुओं की देखभाल की जा रही है। टेमरी गौशाला में सभी पशुओं का संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। गौशाला परिसर में 2 एकड़ क्षेत्र में बारहमासी घास बरसीम लगाई गई है, वहीं 2 एकड़ नई भूमि तैयार कर नेपीयर घास का प्लांटेशन किया गया है।
टेमरी गौशाला बनेगा प्रशिक्षण केंद्र
उप संचालक डॉ. अंजना नायडू ने टेमरी गौशाला को भविष्य में प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने को लेकर गौशाला संचालक से चर्चा की। उन्होंने गौशाला के माध्यम से पशुपालकों को चारा विकास कार्यक्रम से जोड़ने की योजना पर भी विचार-विमर्श किया। योजना के तहत जिले के पशुपालकों को गौशाला का भ्रमण कराया जाएगा और चारा संरक्षण के लिए साईलेज बनाने की विधि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही पशुओं को हरा चारा खिलाने से होने वाले लाभों के बारे में भी पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा।