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खल्लारी माता मंदिर ( फोटो एवं वीडियो सौजन्य नूरेंद्र )
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खल्लारी मेला :  उमड़ी आस्था की भीड़, मौत का कुआं और झूला रहा सबसे बड़ा आकर्षण

महासमुंद के खल्लारी मंदिर में आयोजित चैत्र पूर्णिमा मेला 4 दिन बाद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मन्नतें मांगी। मौत का कुआं, आधुनिक झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहे, वहीं प्रशासन की व्यवस्थाओं के बीच पूरा आयोजन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 05 Apr 2026, 01:25 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 02:00 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
खल्लारी मंदिर में लगने वाला चैत्र पूर्णिमा मेला इस वर्ष भी आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। 1 अप्रैल से शुरू हुआ यह चार दिवसीय मेला 5 अप्रैल को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हुआ। अंतिम दिन भी हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहाड़ी चढ़ते नजर आए। पूरे मेले के दौरान भक्ति, परंपरा और मनोरंजन का अनोखा संगम देखने को मिला।
आखिरी दिन भी लगी रही श्रद्धालुओं की कतार
मेले के समापन दिन रविवार को सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दूर-दराज के गांवों और जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता खल्लारी के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर परिवार सहित पहुंचे।
चौदस की रात से शुरू हुई थी पूजा परंपरा
मेले की शुरुआत परंपरागत विधि से चौदस की रात हुई थी। पहाड़ी पर स्थित सिद्ध बाबा की पूजा के बाद बैगा और ग्रामीणों की मौजूदगी में मातेश्वरी का विशेष श्रृंगार किया गया। आधी रात के बाद जैसे ही मंदिर के पट खुले, भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जो मेले के अंतिम दिन तक बनी रही।
हर साल की तरह बदला मौसम, आस्था और बढ़ी
खल्लारी मेले की खास पहचान रही मौसम की ‘परंपरा’ इस बार भी देखने को मिली। मेले के दौरान अचानक आंधी, तेज हवाएं और हल्की बारिश हुई। स्थानीय मान्यता है कि यह माता के मेला भ्रमण या अधूरी पूजा का संकेत होता है। मौसम के इस बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई।
मौत का कुआं बना सबसे बड़ा आकर्षण
इस बार मेले में डबल डेकर प्लेटफॉर्म वाला “मौत का कुआं” लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। एक साथ 3 कारें और 4 बाइक तेज रफ्तार में दौड़ती नजर आईं। खास बात यह रही कि महिला स्टंट राइडर्स ने भी बाइक चलाकर दर्शकों को रोमांचित किया, जिसे देखने भारी भीड़ उमड़ी।
खल्लारी मेला में झूला बना आकर्षण का केंद्र ( फोटो एवं वीडियो सौजन्य नूरेंद्र )
झूलों और मनोरंजन ने बच्चों से बड़ों तक को लुभाया
मेले में इस बार आधुनिक झूलों की भरमार रही। डबल डिक्स, स्विंग स्टार, आकाश हवाई झूला, सुपर ड्रैगन ट्रेन, ब्रेक डांस और टोरा-टोरा जैसे झूलों ने हर उम्र के लोगों को आकर्षित किया। बच्चों के लिए मिक्की माउस, बोटिंग और छोटे झूले खास आकर्षण बने रहे।
लोक संस्कृति से सजी सांस्कृतिक संध्या
जनपद पंचायत बागबाहरा द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले को खास रंग दिया। चार दिनों तक चले कार्यक्रमों में लोक मंचों और कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी। रात देर तक चले इन आयोजनों में दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ जुटी रही।
प्रशासन की रही मुस्तैदी, शांतिपूर्ण रहा आयोजन
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस बल, स्वास्थ्य टीम और स्वयंसेवकों की तैनाती से पूरा मेला बिना किसी बड़े व्यवधान के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
आस्था, परंपरा और उत्सव का मिला संगम
खल्लारी का यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। हर साल की तरह इस बार भी मेला श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनकर समाप्त हुआ।

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