भारतीय रसोई में मसालों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। हल्दी, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, लाल मिर्च और हर्ब्स जैसे ओरेगैनो व रोजमेरी खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ शरीर के लिए भी उपयोगी होते हैं। शोध बताते हैं कि इन मसालों में मौजूद प्राकृतिक यौगिक, खासकर पॉलीफेनॉल, शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। मसाले आमतौर पर पौधों की जड़, बीज, छाल, तना, फल या फूल की कली से बनाए जाते हैं और अधिकतर सूखे रूप में इस्तेमाल होते हैं। वहीं हर्ब्स पौधों की पत्तियों से मिलते हैं और उनका स्वाद अपेक्षाकृत हल्का व ताजा होता है। मसाले स्वाद में ज्यादा तीखे होते हैं, इसलिए इन्हें कम मात्रा में भी भोजन में इस्तेमाल किया जाता है।
आंतों के अच्छे बैक्टीरिया
शोधकर्ताओं के अनुसार मसालों में मौजूद पॉलीफेनॉल आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। ये बैक्टीरिया पाचन, इम्युनिटी और शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को संतुलित करने में मदद करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि मिश्रित मसालों की एक खुराक भी कुछ लोगों में आंतों के माइक्रोबायोम पर असर डाल सकती है, खासकर उन लोगों में जो सामान्य रूप से मसाले कम खाते हैं। हल्दी, काली मिर्च, अदरक, दालचीनी, ओरेगैनो और रोजमेरी जैसे मसाले आंतों के वातावरण को बेहतर बनाने में मददगार माने जाते हैं। मसालों को दवा नहीं समझना चाहिए। इनका फायदा संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नींद और नियमित जीवनशैली के साथ ज्यादा बेहतर दिख सकता है।
दिमागी सेहत पर असर
मसालों का संबंध सिर्फ पाचन से नहीं, बल्कि दिमागी सेहत से भी जुड़ा हुआ है। कई हर्ब्स और मसालों में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद कर सकते हैं। रोजमेरी, दालचीनी, हल्दी और अदरक जैसे मसालों पर याददाश्त, सूजन और न्यूरोप्रोटेक्शन को लेकर अध्ययन किए जा रहे हैं। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन सूजन कम करने की क्षमता के लिए है। वहीं काली मिर्च में पाया जाने वाला पाइपरिन करक्यूमिन के अवशोषण को बेहतर करता है। यही वजह है कि कई पोषण विशेषज्ञ हल्दी के साथ थोड़ी काली मिर्च लेने की सलाह देते हैं।
मेटाबॉलिक हेल्थ में दालचीनी और अदरक
मेटाबॉलिक हेल्थ का मतलब शरीर में ब्लड शुगर, फैट, वजन, ब्लड प्रेशर और ऊर्जा के संतुलन से है। दालचीनी, अदरक, हल्दी और मेथी जैसे मसालों पर कई अध्ययनों में ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और सूजन से जुड़े मार्कर्स पर संभावित असर देखा गया है। दालचीनी को खास तौर पर ब्लड शुगर मैनेजमेंट से जोड़कर देखा जाता है, जबकि अदरक पाचन और सूजन में मददगार माना जाता है। लाल मिर्च में मौजूद कैप्सैसिन मेटाबॉलिज्म और भूख नियंत्रण से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसका असर व्यक्ति की सेहत, मात्रा और नियमित आहार पर निर्भर करता है।
ज्यादा मात्रा में सेवन से नुकसान
मसालों का सामान्य खाना पकाने में इस्तेमाल आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन इन्हें सप्लीमेंट या बहुत अधिक मात्रा में लेना हर किसी के लिए सही नहीं हो सकता। हल्दी, अदरक और दालचीनी जैसे मसाले कुछ दवाओं के साथ असर कर सकते हैं, खासकर ब्लड थिनर, डायबिटीज या लिवर से जुड़ी दवाओं के मामले में सावधानी जरूरी है। इसलिए किसी बीमारी, गर्भावस्था, सर्जरी की तैयारी या नियमित दवा लेने की स्थिति में मसालों के सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
रोजमर्रा के खाने में शामिल करें
रोजमर्रा के भोजन में हल्दी, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, जीरा, अजवाइन, लाल मिर्च, ओरेगैनो और रोजमेरी जैसे मसालों को संतुलित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। इन्हें सब्जी, दाल, सूप, सलाद, हर्ब टी या मसाला मिश्रण के रूप में लिया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि मसालों का उपयोग स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिए हो, लेकिन संतुलन के साथ। आम रसोई के मसाले शरीर के लिए छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण फायदे दे सकते हैं। ये आंतों की सेहत, दिमागी कार्यप्रणाली, सूजन नियंत्रण और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
