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सद्गुरु काले कपड़ों और मानसिक स्वास्थ्य पर विचार बताते हुए
सद्गुरु काले कपड़ों और मानसिक स्वास्थ्य पर विचार बताते हुए
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सलाह : मानसिक स्वास्थ्य और कपड़ों के रंग का कनेक्शन, जानिए सद्गुरु की बात

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार रंगों का हमारे मन, भावनाओं और ऊर्जा पर प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि काला रंग आसपास की चीजों को सोखने की क्षमता रखता है, इसलिए हर परिस्थिति में लंबे समय तक काले कपड़े पहनने से मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। वहीं सफेद रंग को वे शांति और सुरक्षा से जोड़ते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 23 Jul 2026, 10:15 AM · अपडेट: 23 Oct 2026, 06:30 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

हमारा मानसिक स्वास्थ्य भावनाओं पर काफी हद तक टिका होता है। अगर भावनाएं काबू से बाहर हो जाएं या नेगेटिव इमोशन्स हावी हो जाएं तो मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस बारे में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव का मानना है कि काले रंग के कपड़े पहनना भी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार काला रंग हर तरह की ऊर्जा और भावनाओं को अपने अंदर समाहित कर लेता है। सद्गुरु के अनुसार हमारी कई मानसिक दिक्कतों के पीछे हमारी अपनी भावनाएं जिम्मेदार होती हैं। उदासी, चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास की कमी और हताशा जैसी भावनाएं जीवन में आगे बढ़ने में बाधा बन सकती हैं। 

कपड़ों को लेकर सद्गुरु की राय

अगर इन पर ध्यान न दिया जाए तो मानसिक समस्याएं शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं। सद्गुरु जग्गी वासुदेव का कहना है कि 20 से 25 प्रतिशत मानसिक परेशानियों के पीछे लंबे समय तक हर परिस्थिति में काले रंग के कपड़े पहनना भी एक कारण हो सकता है। हालांकि, उन्होंने भावनाओं को नियंत्रित करने और सकारात्मक सोच अपनाने को मानसिक शांति के लिए जरूरी बताया है।

ऐसी जगह पहनना चाहिए सफेद रंग

काले कपड़े पहनने से क्या होता है

सद्गुरु का कहना है कि काला रंग अपने आसपास की चीजों को सोखने की क्षमता रखता है। अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां आपको ऊर्जा या भावनाओं को ग्रहण करना है तो काले कपड़े उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन अगर आप हर जगह केवल फैशन या पतला दिखने के लिए काला रंग पहनते हैं तो यह आसपास की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को भी अपने अंदर लेने का कारण बन सकता है।

मानसिक परेशानी का दावा

सद्गुरु ने कहा कि कई लोग लंबे समय तक काले कपड़े पहनते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि शोक जैसी परिस्थितियों में भी काले रंग को लंबे समय तक अपनाने से बचना चाहिए। उनके अनुसार जो लोग जीवन से चले गए हैं, उनका सम्मान करना चाहिए, लेकिन जीवित लोगों को जीवन की सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सद्गुरु के मुताबिक, कपड़ों के रंग हमारे मन और भावनाओं पर असर डाल सकते हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति को अपनी जरूरत और परिस्थिति के अनुसार रंगों का चुनाव करना चाहिए, ताकि मानसिक संतुलन बना रहे।

हर जगह काले रंग के कपड़े पहनने से क्या होता है?

सफेद रंग क्यों पहनने की सलाह देते हैं सद्गुरु

सद्गुरु बताते हैं कि अगर आप आसपास की नकारात्मक ऊर्जा या भावनाओं को ग्रहण नहीं करना चाहते तो सफेद रंग पहनना बेहतर हो सकता है। उनके अनुसार सफेद रंग चीजों को सोखने के बजाय उन्हें प्रतिबिंबित करता है और व्यक्ति को एक तरह की सुरक्षा प्रदान करता है।

रंगों का भावनाओं और मानसिक स्थिति पर असर

मनोविज्ञान भी मानता है कि रंगों का हमारे मूड, ऊर्जा और भावनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। लाल रंग को अक्सर ऊर्जा, प्रेम और सतर्कता से जोड़ा जाता है, जबकि सफेद रंग शांति, स्थिरता और फोकस का प्रतीक माना जाता है। वहीं काला रंग एक ओर ताकत और आत्मविश्वास को दर्शाता है, तो दूसरी ओर इसे उदासी और अकेलेपन से भी जोड़ा जाता है।

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