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Proposal for new rules on fines for dumping construction debris (Image Source: AI Photo)
Proposal for new rules on fines for dumping construction debris (Image Source: AI Photo)
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Municipal Corporation: राजधानी में अब सड़क या नालियों में मलबा फेंका तो खैर नहीं! रायपुर नगर निगम लाया कड़े नियम, 1 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

Municipal Corporation: रायपुर नगर निगम ने निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन के लिए नए उपनियमों का मसौदा तैयार किया है। इसमें सड़क पर मलबा फेंकने, नाली जाम करने और नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने व वाहन जब्ती का प्रावधान है। फिलहाल इन नियमों को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 28 Oct 2026, 12:48 PM · 5 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Municipal Corporation: राजधानी रायपुर में निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (Construction & Demolition Waste) से शहर की सुंदरता बिगड़ने और फैलने वाली गंदगी पर लगाम कसने के लिए नगर निगम ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। निगम प्रशासन ने मलबे के सही प्रबंधन के लिए नए उपनियमों का एक विस्तृत मसौदा (Draft) तैयार किया है, जिसमें नियमों की अनदेखी करने वालों पर भारी-भरकम जुर्माने से लेकर वाहन जब्ती तक का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि ये नए नियम सिर्फ एक बार गलती करने वालों के लिए चेतावनी नहीं हैं, बल्कि बार-बार कानून तोड़ने वालों पर शिकंजा कसने के लिए इन्हें श्रेणियों में बांटा गया है। आइए जानते हैं कि इस नए ड्राफ्ट में क्या-क्या मुख्य बातें शामिल हैं:

जुर्माने और कार्रवाई के मुख्य बिंदु

  • सड़क या खुली जगह पर मलबा फेंकना: अगर कोई खुले में या सड़क किनारे वाहन से मलबा फेंकता है, तो पहली बार में 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं, अगर यही गलती तीसरी बार या उसके बाद दोहराई जाती है, तो जुर्माना बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगा और साथ ही दोषी का वाहन भी जब्त कर लिया जाएगा।

  • नाली, नाले या जलस्रोत में मलबा डालना: जल स्रोतों और ड्रेनेज सिस्टम को बचाने के लिए सबसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। नाली या नाले में मलबा फेंकने पर पहली बार में 25,000 रुपये और बार-बार ऐसा करने पर 1 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना वसूला जा सकता है।

  • हाथठेला या छोटे स्तर पर गंदगी फैलाने पर: यदि कोई हाथठेला या सिर पर ढोकर एक टन से कम मलबा किसी सड़क, खाली प्लॉट या नाली के पास फेंकता है, तो पहली बार 2,000 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है।

सड़क पर सिर्फ 24 घंटे की मोहलत 
नए नियमों के मुताबिक, अब आप बिना किसी लिखित अनुमति के सड़क, फुटपाथ, नाली, नाले या निगम के पार्कों में 24 घंटे से ज्यादा मलबा नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा, निर्माण मलबे को घरेलू कचरे के साथ मिलाना भी पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

मकान तोड़ने से पहले लेनी होगी अनुमति

अब शहर में किसी भी पुराने भवन या ढांचे को गिराने से पहले नगर निगम से विधिवत अनुमति लेनी अनिवार्य होगी। अनुमति के लिए दिए जाने वाले आवेदन में यहबताना होगा कि:

  • मलबे की अनुमानित मात्रा कितनी होगी?

  • तोड़फोड़ का समय क्या रहेगा?

  • धूल और प्रदूषण को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

  • सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं और मलबा कहां ले जाया जाएगा?

अनुमोदन मिलने के बाद तय सुरक्षा राशि और शुल्क जमा करना होगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद, मलबे को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने के चालान, तौल पर्ची (Weighing Slip) या पोर्टल पर दर्ज जानकारी निगम को सौंपनी होगी। इसके बिना भवन का पूर्णता (Completion) या अधिभोग (Occupancy) प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।

बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए खास गाइडलाइंस

जो निर्माण या तोड़फोड़ प्रोजेक्ट्स 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक के क्षेत्रफल वाले हैं, उन्हें अपनी एक अलग मलबा प्रबंधन योजना (C&D Waste Management Plan) जमा करनी होगी।

  • इसमें मलबे का वर्गीकरण, उसका भंडारण, परिवहन और रीसाइक्लिंग की पूरी जानकारी देनी होगी।

  • मलबा ले जाने वाले सभी अधिकृत वाहन ऊपर से पूरी तरह ढके होने चाहिए।

  • बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े वाहनों में जीपीएस (GPS) लगाना भी अनिवार्य किया जा रहा है। नगर निगम खुद भी अपनी सड़कों और नालियों के निर्माण में रीसाइकिल किए गए मलबे से बनी सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा।

शहर के दसों जोन में बनेंगे संग्रह केंद्र 

आम जनता की सुविधा और शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए निगम ने एक साल के भीतर अपने सभी दसों जोन में कम से कम एक मलबा संग्रह केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, पुराने अवैध डंपिंग जोन की पहचान कर उनके निपटान की योजना भी बनेगी। यदि नागरिकों को मलबे के उठाव या संग्रह केंद्र से जुड़ी कोई भी शिकायत दर्ज करानी हो, तो वे निगम के हेल्पलाइन नंबर 1100, वार्ड कार्यालय या संबंधित मोबाइल ऐप के जरिए संपर्क कर सकेंगे। निगम ने 15 कार्यदिवसों के भीतर ऐसी शिकायतों का निपटारा करने का प्रस्ताव रखा है।

कितना निकलता है शहर में मलबा?

निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से भारी मात्रा में कचरा निकलता है:

  • हर महीने: लगभग 20,000 मकानों से करीब 20,000 टन मलबा।

  • एक साल में: लगभग 2.40 लाख मकानों से करीब 2.40 लाख टन मलबा।

नोट: फिलहाल ये सभी प्रावधान एक प्रारूप (Draft) के रूप में सामने आए हैं, जिन पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है। हालांकि, शहर के जानकारों का मानना है कि इन नियमों के सख्ती से लागू होने पर राजधानी की सड़कों पर फैली गंदगी और अनियोजित डंपिंग पर काफी हद तक लगाम लगेगी।

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