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Pyare Miyan sentenced to life imprisonment in POCSO case (Image Source: Keertiman Media)
Pyare Miyan sentenced to life imprisonment in POCSO case (Image Source: Keertiman Media)
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POCSO Case: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 78 साल के प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद, ताउम्र कटेगी जेल में रातें

POCSO Case: भोपाल की विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण मामले में प्यारे मियां को उम्रकैद की 10 सजाएं और 77.64 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है। मामले में सह-आरोपी राबिया बी को भी 20 साल के कारावास की सजा दी गई है। यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 28 Oct 2026, 09:29 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
भोपाल
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
POCSO Case: राजधानी की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने इंसानियत को शर्मसार करने वाले एक बेहद संगीन मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मासूम बच्चियों के यौन शोषण के दोषी 78 वर्षीय प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसका मतलब साफ है कि अब यह अपराधी अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे ही रहेगा। इसके साथ ही, अदालत ने उस पर 77.64 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। इस सनसनीखेज मामले में उसकी सहयोगी राबिया बी को भी दोषी करार देते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस घृणित कृत्य को बेहद क्रूर और समाज के लिए असहनीय बताया है।

नौकरी का लालच और 'अब्बू' कहलाने का ढोंग

जांच में सामने आया है कि प्यारे मियां का यह काला कारोबार साल 2014 से चल रहा था। वह बेहद शातिर तरीके से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की नाबालिग बच्चियों को निशाना बनाता था।

  • नौकरी का झांसा: वह बच्चियों को होटल या अन्य जगहों पर नौकरी दिलाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था और उन्हें 10,000 रुपये महीने वेतन देने का वादा करता था।

  • भरोसा जीतने का नाटक: बच्चियों और उनके परिवारों का विश्वास जीतने के लिए वह अक्सर उनके घर भी जाया करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो।

  • शराब पिलाकरवान दरिंदगी: वह मासूमों से खुद को 'अब्बू' कहलवाता था, उन्हें जबरन शराब पिलाकर नशे की हालत में अपनी हवस का शिकार बनाता था।

    साल 2020 का वह खुलासा, जिसने हिला कर रख दिया था 

इस पूरे मामले का पर्दाफाश साल 2020 में तब हुआ, जब रातीबड़ थाना पुलिस को गश्त के दौरान रात के वक्त नशे की हालत में पांच नाबालिग बच्चियां भटकती हुई मिलीं। जब पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने जो सच बताया, उसने सुनने वालों की रूह कंपा दी। बच्चियों ने बताया कि उन्हें एक बर्थडे पार्टी के बहाने बुलाया गया था, जहां उन्हें नशीला पदार्थ पिलाकर उनका शारीरिक शोषण किया गया। इस सुराग के आधार पर जब पुलिस ने शाहपुरा स्थित 'विष्णु हाईटेक सिटी' के एक फ्लैट पर छापा मारा, तो वहां से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं। प्यारे मियां ने उस फ्लैट में हिडन कैमरे (छिपे हुए कैमरे) लगवा रखे थे, जिनकी मदद से वह बच्चियों के अनाथ और निजी पलों के वीडियो रिकॉर्ड करता था। इन वीडियो के जरिए वह पीड़िताओं को ब्लैकमेल करता था और किसी को मुंह खोलने से रोकने के लिए उन पर पिस्तौल तानकर डराता-धमकाता था।

गिरफ्तारी और बुलडोजर कार्रवाई 

जब इस मामले की गूंज चारों तरफ फैली और पुलिस का शिकंजा कसा, तो प्यारे मियां देश छोड़कर भागने की फिराक में जुट गया। उसकी तलाश में जांच एजेंसियों ने तुरंत लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह भोपाल से भागकर इंदौर पहुंचा, रास्ते में आष्टा में अपनी गाड़ी छोड़ी, और फिर दिल्ली से होते हुए श्रीनगर जा पहुंचा। आखिरकार, जम्मू-कश्मीर पुलिस की मुस्तैदी और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से उसे धर दबोचा गया। कानून के शिकंजे के साथ-साथ प्रशासन ने उसकी अवैध संपत्तियों पर भी कड़ा रुख अपनाया और बुलडोजर चलाकर साम्राज्य को नेस्तनाबूद कर दिया। अदालत के इस फैसले से एक बार फिर यह संदेश गया है किवान चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, न्याय के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है।
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