Contractors Protest: राजधानी की सड़कों पर मंगलवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर आने-जाने वाले का ध्यान खींच लिया। जल जीवन मिशन के तहत हुए निर्माण कार्यों के करीब 5,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को लेकर छत्तीसगढ़ के ठेकेदार सीधे सड़क पर उतर आए। विरोध का अंदाज भी ऐसा था कि सरकार और प्रशासन तक सीधी गूंज पहुंचे—छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले ये ठेकेदार राजधानी के व्यस्त राजीव चौक पर हाथों में कटोरा लेकर पहुंच गए।
तीन साल से अटका है भुगतान, दो हजार ठेकेदार संकट में
एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि प्रदेशभर के लगभग 2,000 ठेकेदारों का पैसा पिछले तीन साल से अटका हुआ है। हालाँकि इन ठेकेदारों ने अपनी मेहनत से गांवों तक पानी पहुँचाने के लिए दिन-रात काम किया है, लेकिन इसके बदले उन्हें खाली हाथ रहना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन के तहत इन्होंने कई बड़े और चुनौतीपूर्ण काम पूरे किए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
सिंगल और मल्टी-विलेज पाइपलाइन योजनाएं
सौर ऊर्जा (सोलर) आधारित पेयजल परियोजनाएं
रेट्रोफिटिंग और रनिंग वाटर सप्लाई के काम
नलकूप (ट्यूबवेल) खनन व अन्य आधारभूत संरचनाएं
पाई-पाई को मोहताज हुए ठेकेदार, सिर पर मंडरा रहा कर्ज का बोझ
ठेकेदारों का कहना है कि इस लंबे इंतजार ने उनकी कमर तोड़ दी है। उनकी गाढ़ी कमाई और सारी पूंजी इन प्रोजेक्ट्स में फंस चुकी है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि अब उनके सामने रोजमर्रा का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरी चुकाने, सीमेंट-लोहा जैसी निर्माण सामग्री (मटेरियल) का उधार चुकाने और बैंकों के भारी-भरकम लोन की किस्तें भरने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई ठेकेदार दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
आश्वासन मिले, पर राहत नहीं
ठेकेदारों का कहना है कि वे अपनी इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री से लेकर विभाग के तमाम बड़े अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं और कई बार ज्ञापन भी सौंपे हैं। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। समय पर भुगतान न मिलने का असर अब आने वाले विकास कार्यों और योजनाओं की गति पर भी साफ दिखने लगा है। राजीव चौक पर कटोरा लेकर किए गए इस सांकेतिक प्रदर्शन के जरिए ठेकेदारों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके बकाये का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।






