Cannabis Addiction: आज के समय में नशे की समस्या हमारे समाज के सामने एक बड़ी चुनौती सामने आ रही है। हाल ही में झारखंड में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है - चाहे वह दुर्गा पूजा के दौरान 'नशे को ना कहे' जैसे पोस्टर हों या जून 2026 में मुख्यमंत्री राहुल सोरेन ने 'नशामुक्त झारखंड अभियान' शुरू किया हो - इन सभी से यह साफ है कि सरकार और समाज इस बुराई को लेकर गंभीर हैं। आइये जानते हैं कि बास्केटबॉल कंपनी की सेहत किस तरह से प्रभावित होती है और इससे बाहर अरेस्ट के कौन-कौन से उपाय साबित हो सकते हैं।
शरीर और दिमाग पर गांजे का क्या असर होता है?
आम बोलचाल में कई लोग गांजे को बहुत प्रभाव या नुकसान पहुंचाते हुए नशा मान लेते हैं,लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। बैंकिंग सीधे तौर पर हमारी याददाश्त पर,ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और सही समय पर सही निर्णय लेने की ताकत को प्रभावित किया जा सकता है।
- याददाश्त और सीखने की क्षमता में कमी: जर्नलएडिक्टिव बिहेवियर्स(2025) चपी एक रिसर्च के अनुसार,गांजे की लता से जुड़े लोगों की विचारधारा-समझने वाली 13 शक्तियों का अध्ययन किया गया। इनमें से 10 फ्रैक्चर में हल्के से मध्यम स्तर तक गिरावट दर्ज की गई है। विशेष रूप से पर,हाल ही में पढ़ी या पढ़ी गई बातें याद रखें,दिमाग में जानकारी कुछ देर तक संभाल कर रखने और किसी भी बात को जल्दी समझने की क्षमता पर बुरा असर देखा गया।
- चिंता, शक और मानसिक रोग: अमेरिकी संस्था सीडीसी (सीडीसी) के अनुसार,गांजे के सेवन से कई लोगों में गरीबी, अत्यधिक मोटापा, चिड़चिड़ापन और अवसाद की स्थिति पैदा हो जाती है। इसका संबंध 'साइकोकोसिस' जैसा मानसिक स्थिति से भी स्थापित है, जिसमें व्यक्ति को ऐसी चीजें महसूस होती हैं जैसे वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता है। कम उम्र में तंबाकू सेवन शुरू करने वालों में सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
- फेफड़े और दिल की सेहत पर असर: गांजे का धुआं फेफड़ों को अंदर से नुकसान पहुंचाता है जिससे लगातार खांसी, बलगम और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, दिल की दृष्टि तेज होना और रक्त प्रवाह की अनुमति देना आम बात है। जर्नल हार्ट (एक्टू 2025) की एक रिपोर्ट के अनुसार, गांजे के सेवन और दिल की धमनियों में स्ट्रोंग, स्ट्रोक और दिल की बीमारी से होने वाली अचानक शराब के खतरे के बीच सीधा संबंध देखा गया है।
कैसे पहचानें कि किसी ने गांजे की लत लगाई है?
- पहले के लॉज में अब भारी मात्रा में अल्कोहल लेना।
- गांजे की वजह से काम,पढ़ाई या परिवार के रिश्ते पर बुरा असर पड़ना।
- नुकसान का पूरा निष्कर्ष के बावजूद इसका सेवन जारी रखना।
- बैंक न मिलने पर भारी मोटापा,गुस्सा या छटपटाहट महसूस होना।
गांजे की लता से बाहर निकलने के आसान और असरदार तरीके
- ट्रिगर पॉइंट्स (शुरूआती कारण) को निंदनीय: सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में शराब पीने की चाहत सबसे ज्यादा होती है। क्या यह दोस्तों के बीच बैठना होता है, तनाव के बीच में, या अकेलेपन और इंसाइना से बचने के लिए? उन लोगों से प्लास्टिक और दूरी बनाना बेहद जरूरी है जो गांजे की तरफ खींचते हैं।
- कॉग्नोजी असामान्य बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) की मदद: सीबीटी (CBT) एक बहुत ही प्रभावशाली तरीका है जिसमें व्यक्ति को अपनी नकारात्मक राय दी जाती है,भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करना सिखाया जाता है। 2025 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीटी को 'मोटिवेशनल एन्हांसमेंट थेरेपी' के साथ मिलाने पर एमबीए कोचिंग में बहुत मदद मिलती है। व्यक्ति को यह बताया जाता है कि वह इस लता से बाहर क्यों आना चाहती है और अपने इस संकल्प पर कैसे काम कर रही है।
- वर्गीकरण से मजबूत बनायें: प्रोफेशनल प्रमाणिकों की मदद से व्यक्ति अपने उन स्नातकों को साझा कर सकता है जो उसे नशे की तरफ आकर्षित करते हैं। काउंसलर के अनुसार छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करके इस अभ्यास से धीरे-धीरे दूरी तय की जा सकती है।
- विड्रोल लक्षण: (लैट रिलीज के बाद की शुरुआत) को स्वीकार किया जाता है लंबे समय तक तंबाकू छोड़ने वाले जब तक इसे खत्म कर देते हैं,तो शुरुआती दिनों में नींद न आना,संकोचन,बेचैनी,भूख कम लगना और उदासी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पोर्टफोलियो से साबकर कई लोग नाममात्र का नशा शुरू कर देते हैं। ऐसी स्थिति में खुद को नींद की गोलियां खाने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
- परिवार का साथ और सकारात्मक तनाव: यहां परिवार के सदस्यों की भूमिका सबसे अहम है। मरीज़ पर चिल्लाने या उसे अपमानित करने के बजाय उसके साथ मिलकर, उसे अच्छे से साझा करने के लिए,उनके साथ समय-संपादित करें और एक स्वस्थ विचारधारा के लिए प्रेरित करें। अगर बीच में कभी पर्सनल बिजनेस मैनेजमेंट लेना भी शुरू कर दे,तो इसे अपनी हार न मानें नई स्थापत्य से संग्रहालय जारी रखें।
जागरूकता और उपचार दोनों का समन्वय आवश्यक है
झारखंड जैसे राज्य में जिस प्रकार के गांजे की बड़ी चट्टानें गिर रही हैं,यह साफ है कि पुलिस और प्रशासन के नेटवर्क की जानकारी,इसके फाइनेंसियल और स्टॉक रूट पर कड़ी नजर रहेगी। साथ ही,किशोरों और बच्चों के बीच में स्कूल और किचन के बीच में फ्रैंक पर बात करनी होगी। स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान में नशा मुक्ति और संरक्षण की सुविधाओं को इतनी आसानी से बनाया जा सकता है कि कोई भी पीड़ित बिना किसी डॉक्टर या झिझक के मदद मांग सके। जब पुलिस की कार्रवाई,समाज की जागरूकता और सही चिकित्सीय उपचार तीन एक साथ मिलेंगे,इस समस्या पर पूरी तरह से भौतिक विज्ञान पाया जा सकता है और लोग एक सामान्य,स्वस्थ जीवन की ओर लौटें मजबूत।







