CPR Emergency Guide: अचानक किसी का अचानक बेहोश होकर गिर पड़ना या दिल की धड़कन रुक जाना (कार्डियक अरेस्ट) किसी के लिए भी खौफनाक मंजर हो सकता है। ऐसे वक्त में अगर पास खड़ा कोई इंसान सही कदम उठा ले, तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है। आपातकालीन स्थिति में दी जाने वाली इस प्राथमिक चिकित्सा तकनीक को 'सीपीआर' (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) कहा जाता है। जब दिल अचानक धड़कना या खून पंप करना बंद कर देता है, तब सीपीआर के जरिए मरीज के दिमाग और बाकी जरूरी अंगों तक खून की सप्लाई बनाए रखी जाती है। लेकिन, सीपीआर देने का भी एक सही नियम होता है। गलत समय या गलत तरीके से दिया गया सीपीआर नुकसान भी पहुंचा सकता है।
सबसे पहले समझें: कब तुरंत शुरू करना चाहिए CPR ?
सबसे पहले समझें: कब तुरंत शुरू करना चाहिए CPR? अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक गिर पड़ता है और होश खो बैठता है, तो सबसे पहले ये कदम उठाएं:
- प्रतिक्रिया जांचें: मरीज के कंधे थपथपाएं और जोर से आवाज दें। अगर वह कोई जवाब नहीं दे रहा है और सांस नहीं ले पा रहा है, तो बिना वक्त गंवाए सीपीआर की तैयारी करें।
- सांसों के भ्रम से बचें: कई बार मरीज की सांसें बहुत धीमी, अटकी हुई या हांफने जैसी (Gasping) लगती हैं। इसे सामान्य सांस लेने की स्थिति बिल्कुल न समझें। आपातकालीन मदद लें: आसपास की जगह सुरक्षित देखें, मरीज की नब्ज जांचें और तुरंत 112 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाएं। अगर कोई दूसरा व्यक्ति पास हो, तो उसे एंबुलेंस बुलाने और आसपास AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) डिवाइस ढूंढने को कहें।
- देरी न करें: मेडिकल टीम के आने तक सीपीआर शुरू करने में एक सेकंड का भी विलंब न करें।
वयस्क व्यक्ति को सीपीआर देने की सही गाइडलाइन
- हथेलियों की स्थिति: मरीज को समतल जगह पर लिटाएं। अपनी एक हथेली के निचले हिस्से को उसकी छाती के ठीक बीच में रखें और दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखकर उंगलियों को आपस में फंसा लें।
- दबाव की गति और गहराई: अपनी कोहनियों को एकदम सीधा रखते हुए छाती पर तेजी से दबाव डालें। आपको 1 मिनट में कम से कम 100 से 120 बार छाती दबानी है। छाती लगभग 2 से 2.5 इंच (5 से 6 सेमी) नीचे दबनी चाहिए और फिर उसे वापस सामान्य स्थिति में आने दें।
- माउथ-टू-माउथ सांस देना: अगर आप प्रशिक्षित हैं, तो 30 बार छाती दबाने के बाद मरीज को 2 बार मुंह से सांस (Rescue Breathes) दें। अगर आपने इसकी ट्रेनिंग नहीं ली है या सहज नहीं हैं, तो केवल लगातार छाती दबाकर (Hands-Only CPR) भी जान बचा सकते हैं।
इन परिस्थितियों में भूलकर भी न दें CPR
हर बेहोश मरीज को सीपीआर की जरूरत नहीं होती। इन बातों का खास ध्यान रखें:
- मरीज होश में हो: अगर व्यक्ति होश में है, बातचीत कर रहा है या सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो सीपीआर की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
- बेहोश है लेकिन सांस चल रही है: अगर कोई व्यक्ति बेहोश है पर उसकी नाड़ी (Pulse) चल रही है और वह ठीक से सांस ले रहा है, तो छाती पर दबाव न बनाएं। ऐसे में मरीज को करवट के बल (Recovery Position) लिटा दें ताकि उसकी सांस की नली साफ रहे और तुरंत डॉक्टर को बुलाएं।
- हार्ट अटैक के दौरान: यदि किसी को सीने में दर्द या हार्ट अटैक का शक है, लेकिन वह होश में है और सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर न दें। उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं। हाँ, अगर चलते-चलते वह होश खो दे और सांस बंद हो जाए, तब तुरंत सीपीआर शुरू करें।
- संपादकीय सलाह: आपातकालीन स्थिति में घबराने के बजाय समझदारी से लिया गया फैसला ही किसी की जिंदगी और मौत के बीच का फर्क साबित होता है। इस जानकारी को अपनों के साथ जरूर शेयर करें।







