खाड़ी में बारूदी संकट : 72 घंटों में तीन बड़े हमलों से दहला होर्मुज, क्या टूटने की कगार पर है युद्धविराम?
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की चिंता बढ़ा दी है। कथित ड्रोन हमलों, जवाबी सैन्य कार्रवाई और दोनों देशों की कड़ी चेतावनियों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, लेख में किए गए कई विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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कीर्तिमान न्यूज
28 Jun 2026, 08:30 AM
रायपुर
एक संक्षिप्त और नाजुक शांति के बाद, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) एक बार फिर युद्ध की लपटों में घिर गया है। पिछले 72 घंटों के भीतर इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में लगातार तीन बड़े सैन्य टकराव देखे गए हैं, जिसने पूरे मध्य पूर्व (Middle East) को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिकी नौसेना और ईरानी सेना के बीच शुरू हुआ यह नया संघर्ष इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हाल ही में स्थापित हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह संकट में है।
जहां अमेरिका ने ईरानी तटों और उसके नियंत्रण वाले द्वीपों पर भारी बमबारी की है, वहीं ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया है। इस ताजा तनाव ने खाड़ी देशों की रातों की नींद उड़ा दी है, और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। चारों तरफ बस एक ही डर है—क्या हालात दोबारा 8 अप्रैल से पहले वाले खौफनाक दौर में लौट जाएंगे, जब रोजाना होने वाले हमलों से समंदर का तापमान बढ़ा रहता था? होर्मुज के समंदर में बारूद घुलने की शुरुआत 25 जून को हुई, जब ईरान ने सिंगापुर के एक वाणिज्यिक जहाज 'एवर लवली' पर अचानक ड्रोन हमला कर दिया।
ड्रोन हमलों की बौछार
वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर हुए इस दुस्साहस का जवाब देने के लिए अमेरिकी सेना ने 26 जून की रात को एक व्यापक जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के तटीय क्षेत्रों और रणनीतिक द्वीपों पर मिसाइलें बरसाईं। ईरान ने भी बिना समय गंवाए अगले ही दिन, यानी 27 जून की सुबह, अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी ड्रोन हमलों की बौछार कर दी। इस त्वरित सैन्य टकराव ने वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है कि क्या कूटनीति के सारे रास्ते अब बंद हो चुके हैं। इस पूरे टकराव के केंद्र में दो नायक और उनकी रणनीतिक जिद है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज पर वैश्विक नौवहन के निर्बाध अधिकार को बहाल रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो दूसरी तरफ ईरानी कमान मुज्तबा के नेतृत्व में इस जलमार्ग को अपनी संप्रभुता और आर्थिक आधिपत्य का जरिया मानती है।
संचार केंद्रों को बना रहे निशाना
ईरान का दावा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) के अनुच्छेद 5 के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज और नेविगेशन पर नियंत्रण उसका है, जिसे अमेरिका मानने से साफ इनकार करता रहा है। अमेरिकी वायुसेना ने इस बार हमलों के लिए बेहद सटीक और रणनीतिक ठिकानों को चुना। रात के अंधेरे में होर्मुजगन प्रांत के आसमान में गूंजती फाइटर हाई अलर्ट युद्ध जहजजेट्स की आवाजों के बीच सिरिक तट और केश्म द्वीप पर भयानक धमाके सुने गए। अमेरिका ने मुख्य रूप से ईरान के रडार नेटवर्क, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और संचार केंद्रों को निशाना बनाया। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो केश्म द्वीप से सिरिक तट की दूरी मात्र 95 किलोमीटर है। यह इलाका होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार (मुहाने) पर स्थित है, जहां ईरान ने एक बेहद मजबूत और आधुनिक संचार तंत्र स्थापित कर रखा है।
गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर
इसी रडार और संचार नेटवर्क के माध्यम से ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ओमान की खाड़ी से लेकर फारस की खाड़ी तक अमेरिकी नौसेना की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखती है। यही कारण है कि अमेरिकी रणनीतिकारों ने सबसे पहले इसी 'सुरक्षा कवच' को ध्वस्त करने की रणनीति अपनाई, ताकि ईरान की निगरानी क्षमता को कमजोर किया जा सके। इस पूरे सैन्य ऑपरेशन में अमेरिका ने एक बेहद अनूठा और सुरक्षित पैटर्न अपनाया। हमलों के लिए मध्य पूर्व या खाड़ी के किसी भी देश की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बजाय, अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में तैनात अपने विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) से लगभग छह अत्याधुनिक फाइटर जेट्स को रवाना किया।
90 मिनट चला गोपनीय ऑपरेशन
इन विमानों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र का उपयोग करते हुए फारस की खाड़ी पार की और लगभग 90 मिनट तक चले इस गोपनीय ऑपरेशन में ईरान के संचार टावरों और ड्रोन स्टेशनों को तबाह कर दिया। अमेरिका को इस बात का भली-भांति आभास था कि यदि उसने सैन्य कार्रवाई के लिए किसी मित्र खाड़ी देश की धरती का उपयोग किया, तो ईरान उन देशों को निशाना बनाएगा, जिससे पूरा अरब क्षेत्र इस युद्ध की आग में सीधे झुलस जाएगा। इसी रणनीति के कारण ईरान उस तीव्रता से जवाबी हमला नहीं कर सका, जैसी उससे अपेक्षा की जा रही थी।
सीधे शब्दों में दी चेतावनी
हालांकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन भेजे, लेकिन अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली और डिस्ट्रॉयर्स ने उन्हें हवा में ही मार गिराया। इस ताजा टकराव के बाद ईरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है। तेहरान ने वाशिंगटन और पेंटागन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि दोबारा उसकी संप्रभुता का उल्लंघन हुआ, तो इसकी अंतिम कीमत पूरे अरब जगत को चुकानी होगी। ईरान ने घोषणा की है कि किसी भी नए हमले की स्थिति में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और उसके सहयोगियों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर देगा।
दोनों शक्तियों की जिद
अमेरिकी राजनीति में भी इस हमले की गूंज सुनाई दे रही है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन हमलों से तनाव कम होने के बजाय और बढ़ेगा और यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ईरान के साथ सैन्य गतिरोध निकट भविष्य में समाप्त होने वाला नहीं है। दोनों शक्तियों के बीच की यह जिद अब एक ऐसे चौराहे पर आ खड़ी हुई है, जहां से पूर्ण युद्ध का रास्ता बेहद करीब और साफ नजर आता है।