छत्तीसगढ़ की सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारी अपनी चार सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर सोमवार को एक दिवसीय हड़ताल करेंगे। हड़ताल के दौरान प्रदेशभर की समितियों में तालाबंदी रहेगी। खरीफ सीजन के बीच इस आंदोलन से किसानों को खाद-बीज वितरण और अन्य जरूरी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सहकारी समिति गोढ़ी के समिति प्रबंधक बद्री प्रसाद तिवारी ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र साहू और छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कम्प्यूटर ऑपरेटर संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे के आह्वान पर यह आंदोलन किया जा रहा है। जिले की सभी 117 सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारी संयुक्त बैनर तले हड़ताल में शामिल होंगे।
धरना-प्रदर्शन के बाद सौंपेंगे ज्ञापन
हड़ताल के दौरान कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करेंगे और रैली निकालकर शासन के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में धान खरीदी की पूरी सूखत को मान्यता देते हुए वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक की राशि समितियों को उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटरों को पूरे साल मासिक वेतन देने की मांग भी रखी गई है।प्रबंधकीय अनुदान और सेवा नियम में बदलाव की मांग
कर्मचारी मध्यप्रदेश की तर्ज पर सभी समितियों को तीन-तीन लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान देने की मांग कर रहे हैं। साथ ही सेवा नियम 2018 में संशोधन कर भविष्य निधि, वेतन पुनरीक्षण और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 50 प्रतिशत पदों पर समिति कर्मचारियों की भर्ती की मांग भी शामिल है। कर्मचारियों की हड़ताल से खरीफ सीजन के दौरान समितियों में होने वाले खाद-बीज वितरण और किसानों से जुड़े अन्य काम प्रभावित हो सकते हैं। इससे किसानों को जरूरी सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।