दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अक्सर अपनी बेबाकी और तीखे बयानों को लेकर सियासी गलियारों में छाई रहती हैं। लेकिन इस बार उनके चर्चा में आने की वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनके दफ्तर की एक 'लक्जरी कुर्सी' बन गई है। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वह एक बेहद आधुनिक ऑफिस चेयर पर बैठी नजर आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि इस एक अकेली कुर्सी की कीमत 66,000 रुपये से लेकर 82,000 रुपये के बीच है। इस तस्वीर के सामने आते ही इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है।
क्यों खास है सीएम की यह 'हाई-टेक' कुर्सी?
शुरुआती दावों के मुताबिक, यह कोई आम दफ्तर वाली कुर्सी नहीं है। इसे रीढ़ की हड्डी और शारीरिक आराम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
एडवांस्ड रीक्लाइनर सिस्टम: इसे यूजर की जरूरत के हिसाब से किसी भी एंगल पर मोड़ा जा सकता है।
एर्गोनोमिक बॉडी सपोर्ट: लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से आरामदायक मानी जाती है।
इनबिल्ट मसाज फंक्शन: चर्चा है कि इस प्रीमियम चेयर में थेरेपी और मसाज जैसे फीचर्स भी शामिल हैं, जो थकान कम करते हैं।
नोट: हालांकि इस कुर्सी के इन खास फीचर्स और इसकी वास्तविक कीमत को लेकर अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) या किसी आधिकारिक स्रोत से कोई पुष्टि नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर मचा घमासान: 'VIP कल्चर' बनाम 'हेल्थ केयर'
तस्वीर वायरल होने के बाद माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं:
| विरोध करने वालों का तर्क (विपक्ष और जनता) | समर्थन करने वालों का तर्क (समर्थक और विशेषज्ञ) |
| फिजूलखर्ची का आरोप: यूजर्स का कहना है कि जब आम जनता टैक्स और महंगाई से परेशान है, तो नेताओं के लिए इतनी महंगी कुर्सियों पर जनता का पैसा क्यों बहाया जा रहा है? | स्वास्थ्य और कार्यक्षमता: समर्थकों का तर्क है कि मुख्यमंत्री जैसे उच्च और जिम्मेदारी वाले पद पर बैठे व्यक्ति को 14-16 घंटे काम करना पड़ता है। अच्छी कुर्सी उनकी सेहत के लिए जरूरी है। |
| VIP कल्चर पर सवाल: इसे राजनीतिक दिखावा और जनता की कमाई का दुरुपयोग बताया जा रहा है। | बेवजह का विवाद: कई लोगों का मानना है कि आज के दौर में कॉरपोरेट दफ्तरों में ऐसी कुर्सियां आम हैं, इसे मुद्दा बनाना राजनीति से प्रेरित है। |
राजनीति और पब्लिक परसेप्शन की जंग
यह मामला अब सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार की 'सादगी' के दावों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं, सत्ता पक्ष के करीबियों का कहना है कि यह विपक्ष की हताशा है, जो कामकाज के मुद्दों पर न लड़कर एक कुर्सी को विवाद का केंद्र बना रहा है।
डिजिटल युग में नेताओं की हर छोटी-बड़ी गतिविधि जनता की नजर में होती है। रेखा गुप्ता की इस एक वायरल तस्वीर ने यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में एक 'कुर्सी' भी सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर कोई आधिकारिक सफाई पेश करता है या नहीं।
