छत्तीसगढ़ में देसी गोवंश की सुरक्षा, सेवा और उन्हें राज्य माता का दर्जा देने की मांग को लेकर सोमवार को महासमुंद में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। 'गौ सेवा आह्वान समिति' के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों गौ सेवकों ने शहर के लोहिया चौक से कलेक्टोरेट तक एक पैदल रैली निकाली और प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपना ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन की सबसे खास बात यह रही कि इसके साथ जिले की सभी तहसीलों से जुटाए गए 4 लाख 64 हजार से भी अधिक लोगों के हस्ताक्षर संलग्न किए गए थे। गौ सेवकों का कहना है कि वे बीते लंबे समय से क्षेत्र के गाँव-गाँव और गलियों में जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ रहे थे, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिला है।

क्या हैं मुख्य मांगें ?
समिति ने राज्य और केंद्र सरकार के सामने प्रमुख रूप से ये बातें रखी हैं:
- राष्ट्रमाता और राज्य माता का दर्जा: देसी (वेदलक्षणा) गोवंश को छत्तीसगढ़ में 'राज्य माता' घोषित किया जाए और केंद्र सरकार से उन्हें 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की सिफारिश भेजी जाए।
- पूर्ण सुरक्षा व सेवा: प्रदेश में देसी नस्ल की गायों की बेहतर देखभाल और उनकी पूर्ण सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
- गो-आधारित अर्थव्यवस्था: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए गो-आधारित उत्पादों और पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए।
रैली में उमड़ा गौ सेवकों का हुजूम
लोहिया चौक से शुरू हुई यह रैली कलेक्टोरेट पहुंचकर सभा में बदल गई, जहां समिति के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इस अवसर पर गौ सेवा आह्वान के प्रदेश मीडिया प्रभारी गुड्डा सिन्हा, गौ सेवा जिला आयोग के अध्यक्ष निलेश पटेल, पल्लवी दुबे, शहर अध्यक्ष सुमन सेंद्रे, ईवन साहू, विजय महतो, हिरेंद्र सोनी, हर्ष चंद्राकर, विपिन महंती, चंदन नेताम, गोलू साहू, रितेश गोलछा, धर्मेन्द्र महोबिया, देवीचंद राठी और गौरव राठी समेत जिले भर से आए बड़ी संख्या में गौ सेवक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।