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पेपर लीक मामला
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NEET-UG 2026 पेपर लीक : देश की सबसे बड़ी परीक्षा पर उठे गंभीर सवाल

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान पुलिस की Special Operations Group जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि कथित प्रश्नपत्र परीक्षा से 15 दिन से एक महीने पहले तक कुछ छात्रों और बिचौलियों तक पहुंच चुका था। दावा है कि वायरल सामग्री के लगभग 600 अंकों के सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे। जांच के अनुसार, यह सामग्री सबसे पहले सीकर के मेडिकल काउंसलिंग कारोबारी राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल तक पहुंची।

कीर्तिमान न्यूज
11 May 2026, 04:12 PM
📍 राजस्थान

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। लगभग हर बड़ी परीक्षा के बाद पेपर लीक, धांधली या फर्जीवाड़े के आरोप सामने आते हैं। अब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 भी विवादों में घिर गई है। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र वायरल होने और उसे मोटी रकम लेकर छात्रों तक पहुंचाने के आरोपों ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। इस मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं, जिनसे एक बड़े संगठित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।

परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचा कथित पेपर

जांच एजेंसियों के अनुसार

पेपर परीक्षा से करीब 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक कुछ छात्रों और बिचौलियों के पास पहुंच चुका था। एसओजी को ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि प्रश्नों की फाइल कई बार अलग-अलग लोगों को फॉरवर्ड की गई थी। शुरुआती जांच में यह मामला केवल “गेस पेपर” का नहीं बल्कि असली प्रश्नपत्र लीक होने का प्रतीत हो रहा है।

600 अंकों तक के सवाल मिलने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, छात्रों तक जो प्रश्न बैंक या गेस पेपर पहुंचाया गया था, उसमें बड़ी संख्या में ऐसे सवाल शामिल थे जो वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। दावा किया जा रहा है कि 720 अंकों के पेपर में लगभग 600 अंकों के सवाल हूबहू समान पाए गए। इतना ही नहीं, कई प्रश्नों के विकल्पों का क्रम भी असली पेपर जैसा बताया जा रहा है। इससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा हो गया है कि परीक्षा से पहले ही असली पेपर का बड़ा हिस्सा बाहर पहुंच चुका था।

कौन है राकेश मंडावरिया?

जांच में सामने आया है कि यह

 गेस पेपर सबसे पहले राजस्थान के सीकर जिले में मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग का काम करने वाले राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल फोन तक पहुंचा था। मंडावरिया सीकर जिले की खंडेला तहसील के समर्थपुरा गांव का निवासी बताया जा रहा है। गांव के लोगों के अनुसार, उसने दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद गांव छोड़ दिया था और आगे चलकर BDS की पढ़ाई की। पिछले चार-पांच वर्षों से वह सीकर की पिपराली रोड पर मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़ा कार्यालय संचालित कर रहा था, जहां MBBS सहित मेडिकल कोर्स में प्रवेश संबंधी सलाह दी जाती थी।

केरल से राजस्थान तक कैसे पहुंचा पेपर?

एसओजी की जांच में यह भी सामने आया है कि 

प्रश्नपत्र एक MBBS छात्र के माध्यम से राजस्थान पहुंचा। बताया जा रहा है कि यह छात्र मूल रूप से राजस्थान के चूरू जिले का रहने वाला है और फिलहाल केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी छात्र ने सबसे पहले प्रश्नों की फाइल मंडावरिया तक पहुंचाई थी। इसके बाद यह सामग्री अलग-अलग छात्रों और ग्रुप्स में शेयर हुई या नहीं, इसकी गहन जांच की जा रही है।

एन्क्रिप्टेड ऐप्स भी जांच के दायरे में

जांच अधिकारियों को संदेह है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क केवल व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं था। कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल की भी आशंका जताई जा रही है। कुछ डिजिटल चैट्स में “फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स” जैसे संकेत मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सामग्री बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाई गई थी।

सीकर का कोचिंग नेटवर्क फिर चर्चा में

राजस्थान का सीकर पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं और कोचिंग नेटवर्क को लेकर चर्चा में रहा है। यहां बड़ी संख्या में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि कोचिंग और एडमिशन नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

NTA ने क्या कहा?

इस बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने भी इस मामले पर अपना बयान जारी किया है। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा के दौरान कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। हालांकि परीक्षा के चार दिन बाद, 7 मई 2026 की देर शाम एजेंसी को कथित अनियमितताओं और कदाचार से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त हुईं। NTA ने स्पष्ट किया है कि मामला फिलहाल जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएंगे।

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