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रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम, दंतेवाड़ा में बड़ा अभियान शुरू
रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम, दंतेवाड़ा में बड़ा अभियान शुरू
दंतेवाड़ा (दक्षिण बस्तर)

नई पहल : दंतेवाड़ा में खेत बचाओ अभियान शुरू, प्राकृतिक खेती को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

दंतेवाड़ा में खेत बचाओ अभियान के तहत प्राकृतिक खेती और मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्देश्य मिट्टी संरक्षण, लागत में कमी और किसानों की आय बढ़ाना है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 09 Jun 2026, 11:02 AM · अपडेट: 13 Oct 2026, 02:22 PM
दंतेवाड़ा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

दंतेवाड़ा जिले में किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती और मिलेट्स (मोटे अनाजों) के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल के तहत “खेत बचाओ अभियान” की शुरुआत की जा रही है, जिसे जिले में कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

कृषि विभाग द्वारा तैयार इस रणनीतिक योजना का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पारंपरिक बीजों का संरक्षण और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान दंतेवाड़ा को प्राकृतिक खेती, जैव विविधता संरक्षण और किसान समृद्धि की नई पहचान देगा।

मिलेट्स को ‘श्री अन्न’ के रूप में बढ़ावा

जिले में ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन्हें ‘श्री अन्न’ और ‘सुपरफूड’ का दर्जा दिया गया है। ये फसलें कम पानी और कम लागत में उगती हैं तथा सूखा-रोधी होने के कारण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों में भी उपयोगी हैं।

पांच चरणों में क्रियान्वयन

योजना को पांच चरणों में लागू किया जाएगा—

  • पहले चरण में मृदा स्वास्थ्य मैपिंग और सॉयल हेल्थ कार्ड को मजबूत किया जाएगा।
  • दूसरे चरण में मिलेट्स और स्थानीय फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • तीसरे चरण में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • चौथे चरण में सामुदायिक बीज बैंक और पारंपरिक बीज मंडियों की स्थापना होगी।
  • पांचवें चरण में हरित खाद पौधों जैसे ग्लिरिसिडिया का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा।
    इसके साथ ही एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य भी रखा गया है।

किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से आने वाले वर्षों में मिट्टी के जैविक कार्बन स्तर में वृद्धि होगी। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। मिलेट्स को पोषण का बेहतर स्रोत माना जाता है, जो हृदय स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती, मधुमेह नियंत्रण और शरीर के समग्र पोषण में सहायक हैं।

कृषि क्षेत्र में नई दिशा

जिले में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि आय के स्रोत बढ़ें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की पद्धति में बदलाव नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसान आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि यह योजना सफल होती है, तो दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ के लिए उदाहरण बन सकता है।

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