दंतेवाड़ा जिले में किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती और मिलेट्स (मोटे अनाजों) के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल के तहत “खेत बचाओ अभियान” की शुरुआत की जा रही है, जिसे जिले में कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
कृषि विभाग द्वारा तैयार इस रणनीतिक योजना का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पारंपरिक बीजों का संरक्षण और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान दंतेवाड़ा को प्राकृतिक खेती, जैव विविधता संरक्षण और किसान समृद्धि की नई पहचान देगा।
मिलेट्स को ‘श्री अन्न’ के रूप में बढ़ावा
पांच चरणों में क्रियान्वयन
योजना को पांच चरणों में लागू किया जाएगा—
- पहले चरण में मृदा स्वास्थ्य मैपिंग और सॉयल हेल्थ कार्ड को मजबूत किया जाएगा।
- दूसरे चरण में मिलेट्स और स्थानीय फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- तीसरे चरण में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- चौथे चरण में सामुदायिक बीज बैंक और पारंपरिक बीज मंडियों की स्थापना होगी।
- पांचवें चरण में हरित खाद पौधों जैसे ग्लिरिसिडिया का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा।इसके साथ ही एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य भी रखा गया है।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
कृषि क्षेत्र में नई दिशा
जिले में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि आय के स्रोत बढ़ें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की पद्धति में बदलाव नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसान आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि यह योजना सफल होती है, तो दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ के लिए उदाहरण बन सकता है।
