आरंग से लगे नगर पंचायत समोदा में उस वक्त सियासी सरगर्मी तेज हो गई, जब सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल होने लगा। इस पत्र में नगर पंचायत के उपाध्यक्ष सहित सभी 5 निर्वाचित भाजपा पार्षदों द्वारा सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने की बात कही जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित इस पत्र के सामने आने के बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि वास्तविक रूप से पार्षदों द्वारा इस्तीफा दिए जाने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वायरल हो रहे इस पत्र ने स्थानीय निकाय प्रशासन और नौकरशाही की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। पत्र के माध्यम से पार्षदों ने अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि नगर पंचायत के शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों को लगातार प्रताड़ित और उपेक्षित किया जा रहा है, जिससे वे जनता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।

पत्र में पार्षदों ने नाराजगी जाहिर की
पार्षदों का कहना है कि सूबे में अपनी ही सरकार होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे हैं, जिससे विकास कार्यों की गति पूरी तरह ठप हो चुकी है। पत्र में पार्षदों ने साफ तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा है कि उनके वार्डों में बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि वार्डों में नल, नाली और पानी की निकासी जैसे बेहद सामान्य और जरूरी काम भी नहीं कराए जा रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता और अफसरों के अड़ियल रवैये के कारण क्षेत्र में विकास कार्य शून्य होने की बात कही गई है। पार्षदों का तर्क है कि जब वे सत्ताधारी दल में होने के बावजूद अपनी ही जनता की बुनियादी समस्याओं को हल कराने में खुद को बेबस पा रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता और इसी वजह से उन्होंने यह कड़ा पत्र लिखा है।
पत्र में भाजपा पार्षदों के हस्ताक्षर होने का दावा
इस वायरल पत्र पर नगर पंचायत समोदा के उपाध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक 06 के पार्षद अंगेश्वर देवांगन, डॉ. बी.आर. अंबेडकर वार्ड क्रमांक 04 के पार्षद विक्रांत सोनकर, राजीव गांधी वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद अमर निषाद, वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद चेतन साहू और वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद डोमन साहू के नाम और हस्ताक्षर नजर आ रहे हैं। इस मामले में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही कल के कार्यक्रम में किसी जनप्रतिनिधि ने मंच से इस्तीफा नहीं दिया हो, लेकिन इस तरह के पत्र का वायरल होना साफ तौर पर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ पार्षदों के भीतर पनप रहे भारी असंतोष को दर्शाता है। अब देखना लाजमी होगा कि इस वायरल पत्र को संज्ञान में लेकर संगठन और मुख्यमंत्री कार्यालय इस अंदरूनी कलह और प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। इधर वायरल ख़बर को नगर पंचायत समोदा के उपाध्यक्ष अंगेश्वर देवांगन ने गलत बताया जबकि वायरल ख़बर पर उनके हस्ताक्षर है।
कांग्रेस ने साधा भाजपा सरकार पर निशाना
वायरल पत्र पर पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के अपने ही पार्षद प्रशासनिक प्रताड़ना और उपेक्षा से त्रस्त हैं। जब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की ही कोई सुनवाई नहीं हो रही और उन्हें इस्तीफे की चेतावनी देनी पड़ रही है, तो प्रदेश की आम जनता का क्या हाल होगा? साय सरकार में विकास कार्य पूरी तरह शून्य हो चुके हैं और नौकरशाही बेलगाम है।"