कोलकाता टकसाल में ढाला गया है 35 ग्राम का चांदी का सिक्का
इस सिक्के को काफी मजबूत और आकर्षक स्वरूप दिया गया है। इसकी धातु संरचना (Metal Composition) में:
50% चांदी
40% तांबा
5% निकल
5% जस्ता
का उपयोग किया गया है। सुधीर लूणावत का कहना है कि यह सिक्का केवल एक मुद्रा नहीं, बल्कि माता साहिब हासी देवी के महान आध्यात्मिक जीवन, त्याग और समाज कल्याण की अमर गाथा को संजोने का एक स्थायी माध्यम है।
सिंधी समाज के लिए गौरव का पल: शदाणी दरबार
आयोजन को लेकर शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "यह केवल शदाणी दरबार ही नहीं, बल्कि पूरे सिंधी सनातनी समाज के लिए एक बेहद गर्व और ऐतिहासिक पल है। माता साहिब हासी देवी का पूरा जीवन मानवता, भक्ति और लोक-कल्याण के लिए समर्पित रहा। भारत सरकार द्वारा उनके नाम पर सिक्का और टिकट जारी करना उनके महान कार्यों का सच्चा सम्मान है।
महज 26 साल की उम्र में संभाली थी गुरु गद्दी
माता साहिब हासी देवी के जीवन सफर पर नजर डालें तो उनका जन्म वर्ष 1826 में अविभाजित भारत के सिंध प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान) स्थित खानपुर महार में हुआ था। अद्भुत प्रतिभा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माता साहिब ने मात्र 26 वर्ष की आयु में शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश्वर के रूप में गुरु गद्दी की जिम्मेदारी संभाली थी।
इसके बाद लगातार 57 वर्षों तक उन्होंने इस आध्यात्मिक दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया। अपने जीवनकाल में उन्होंने:
शिक्षा और संस्कृति: हिंदी, संस्कृत भाषा और शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया।
समाज सेवा: अनाथों, विधवाओं, गरीबों और असहाय लोगों के लिए दरबार के दरवाजे हमेशा खुले रखे।
मानव सेवा को ही ईश्वर की सच्ची भक्ति मानने वाली इस महान आत्मा का 30 अप्रैल 1909 को देवलोकगमन हुआ था।
जानिए कैसे कर सकेंगे स्मारक सिक्के की बुकिंग?
विमोचन समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद आम नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए इस 200 रुपये के स्मारक सिक्के की बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, जो लोग इस ऐतिहासिक सिक्के को अपने संग्रह में शामिल करना चाहते हैं या माता जी के आशीर्वाद के रूप में रखना चाहते हैं, वे:
शदाणी दरबार की अधिकृत शाखाओं/इकाइयों के माध्यम से।
कोलकाता टकसाल (SPMCIL) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।







