एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित लोगों के लिए एक नई वैज्ञानिक खोज उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा कॉलेज ऑफ मेडिसिन की शोधकर्ता और एसोसिएट प्रोफेसर क्लाउडिया एंडल एक ऐसे प्रोबायोटिक पर अध्ययन कर रही हैं, जो न केवल एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि इस बीमारी से जुड़े इसोफेगल कैंसर के खतरे को भी घटा सकता है।
एसिड रिफ्लक्स
एसिड रिफ्लक्स एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली स्थिति है, जिसमें पेट का एसिड भोजन नली में आ जाता है सामान्य परिस्थितियों में भोजन नली और पेट के बीच मौजूद एक वाल्व एसिड को ऊपर आने से रोकता है, लेकिन जब यह वाल्व कमजोर हो जाता है तो एसिड ऊपर चढ़ने लगता है इससे मरीज को सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन और भोजन निगलने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है दुनिया भर में करोड़ों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं और कई मामलों में यह बीमारी वर्षों तक बनी रहती है।
केवल जलन नहीं, कैंसर का भी खतरा
एसिड रिफ्लक्स को केवल सीने में जलन की समस्या समझना बड़ी भूल हो सकती है लंबे समय तक लगातार एसिड रिफ्लक्स रहने से भोजन नली की आंतरिक परत को नुकसान पहुंच सकता है। यह स्थिति आगे चलकर बैरेट्स इसोफेगस नामक बीमारी में बदल सकती है, जिसे इसोफेगल कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक है अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार इसोफेगल कैंसर के मरीजों की पांच वर्षीय जीवित रहने की दर लगभग 22 प्रतिशत है, जो इसे सबसे गंभीर और जानलेवा कैंसरों में शामिल करती है।
प्रोबायोटिक कर सकता है मदद
क्लाउडिया एंडल और उनकी शोध टीम इस बात की जांच कर रही है कि क्या लाभकारी बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स शरीर में होने वाली सूजन को कम कर सकते हैं और भोजन नली की कोशिकाओं को नुकसान से बचा सकते हैं। प्रोबायोटिक्स ऐसे सूक्ष्म जीव होते हैं जो शरीर के लिए लाभदायक हैं। ये सामान्य रूप से दही, किण्वित खाद्य पदार्थों और कुछ सप्लीमेंट्स में पाए जाते हैं यदि सही प्रकार के प्रोबायोटिक्स का उपयोग किया जाए तो वे पाचन तंत्र के माइक्रोबायोम को संतुलित कर सकते हैं और एसिड रिफ्लक्स से होने वाली सूजन को कम कर सकते हैं।
माइक्रोबायोम और कैंसर का संबंध
हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि मानव शरीर में मौजूद खरबों सूक्ष्म जीव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं इसे माइक्रोबायोम कहा जाता है। जब इस माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में सूजन बढ़ सकती है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है भोजन नली में मौजूद सूक्ष्म जीवों का असंतुलन भी कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकता है।
पारंपरिक उपचारों की सीमाएं
वर्तमान में एसिड रिफ्लक्स के इलाज के लिए प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (PPI) और अन्य दवाओं का उपयोग किया जाता है, जो पेट में बनने वाले एसिड को कम करती हैं हालांकि ये दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में प्रभावी होती हैं, लेकिन कई मरीजों को लंबे समय तक इनका सेवन करना पड़ता है कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक इन दवाओं के उपयोग से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों पर भी चिंता जताई गई है।
कैंसर रोकथाम
शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वैज्ञानिक केवल एसिड रिफ्लक्स के इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि क्या प्रोबायोटिक्स इसोफेगल कैंसर की रोकथाम में भूमिका निभा सकते हैं यदि सूजन को कम करके और कोशिकाओं की सुरक्षा करके कैंसर के खतरे को घटाया जा सके तो यह चिकित्सा विज्ञान में बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी कैंसर की रोकथाम हमेशा उसके उपचार से अधिक प्रभावी और कम खर्चीली होती है।
