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स्पास्टिसिटी के इलाज में नई उम्मीद, जीन थेरेपी पर बड़ी सफलता
स्पास्टिसिटी के इलाज में नई उम्मीद, जीन थेरेपी पर बड़ी सफलता
सेहत

जीन थेरेपी : बदलेगी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज 

वैज्ञानिकों ने निष्क्रिय वायरस की मदद से विशेष जीनों को रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाकर स्पास्टिसिटी के इलाज में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। प्रारंभिक शोध में यह तकनीक मांसपेशियों की कठोरता और ऐंठन को कम करने में प्रभावी दिखाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह जीन थेरेपी स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और अन्य न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।

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प्रकाशित: 09 Jun 2026, 04:52 PM · अपडेट: 18 Oct 2026, 05:07 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्या स्पास्टिसिटी के इलाज में वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई जीन थेरेपी विकसित की है, जिसमें निष्क्रिय (Inactive) वायरस की मदद से विशेष जीनों को सुरक्षित रूप से रीढ़ की हड्डी तक पहुंचाया गया। प्रारंभिक शोध परिणामों से संकेत मिले हैं कि यह तकनीक स्पास्टिसिटी के लक्षणों को कम करने और मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद कर सकती है यदि भविष्य के परीक्षण भी सफल रहते हैं तो यह खोज लकवा, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और सेरेब्रल पाल्सी जैसी स्थितियों से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकती है।

स्पास्टिसिटी क्या है

स्पास्टिसिटी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें मांसपेशियां असामान्य रूप से कठोर और तनावग्रस्त हो जाती हैं इसके कारण मरीज को हाथ-पैर हिलाने में कठिनाई, दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और चलने-फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ता है यह समस्या अक्सर तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच संदेश पहुंचाने वाली तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, सेरेब्रल पाल्सी और कुछ अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में स्पास्टिसिटी आमतौर पर देखी जाती है।

निष्क्रिय वायरस का उपयोग

शोधकर्ताओं ने इस नई तकनीक में एक विशेष प्रकार के निष्क्रिय वायरस का उपयोग किया गया यह वायरस बीमारी फैलाने में सक्षम नहीं होता, बल्कि केवल जीन को शरीर की लक्षित कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करता है वैज्ञानिकों ने वायरस के भीतर ऐसे जीन डाले जो रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं जब यह जीन संबंधित कोशिकाओं तक पहुंचे तो उन्होंने उन संकेतों को संतुलित करने में मदद की जो मांसपेशियों की अत्यधिक कठोरता और ऐंठन के लिए जिम्मेदार होते हैं।

जीन थेरेपी

मानव शरीर में तंत्रिका कोशिकाएं रासायनिक संकेतों के माध्यम से एक-दूसरे से संवाद करती हैं स्पास्टिसिटी की स्थिति में यह संतुलन बिगड़ जाता है और मांसपेशियां लगातार तनाव की स्थिति में बनी रहती हैं नई जीन थेरेपी का उद्देश्य इसी असंतुलन को ठीक करना है शोधकर्ताओं के अनुसार थेरेपी द्वारा पहुंचाए गए जीन ऐसे प्रोटीन तैयार करने में मदद करते हैं जो तंत्रिका संकेतों को नियंत्रित करते हैं और मांसपेशियों की अनावश्यक सक्रियता को कम कर सकते हैं।

पशु परीक्षणों में मिले सफल परिणाम 

शुरुआती प्रयोगशाला और पशु मॉडल परीक्षणों में इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं वैज्ञानिकों ने पाया कि उपचार के बाद मांसपेशियों की कठोरता कम हुई और गतिशीलता में सुधार देखने को मिला। साथ ही किसी गंभीर दुष्प्रभाव की जानकारी भी सामने नहीं आई शोधकर्ता स्पष्ट कर रहे हैं कि यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है और मनुष्यों पर व्यापक परीक्षणों की आवश्यकता होगी।

मौजूदा उपचारों की सीमाएं

वर्तमान में स्पास्टिसिटी के इलाज के लिए दवाएं, फिजियोथेरेपी, इंजेक्शन और कुछ मामलों में सर्जरी का सहारा लिया जाता है लेकिन इन उपचारों से अक्सर केवल लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है, बीमारी के मूल कारण को नहीं कई मरीजों को लंबे समय तक दवाएं लेनी पड़ती हैं और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं नई जीन थेरेपी को इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समस्या की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान देने की क्षमता रख सकती है।

न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उपलब्धि

यदि यह तकनीक मानव परीक्षणों में भी सफल साबित होती है तो यह न्यूरोलॉजी और पुनर्वास चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी इससे केवल स्पास्टिसिटी ही नहीं, बल्कि कई अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों के इलाज के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं जीन थेरेपी पहले ही कई दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के उपचार में सफलता दिखा चुकी है और अब इसका उपयोग न्यूरोलॉजिकल विकारों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
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