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चतुर्भुज सुरक्षा संवाद
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QUAD की रणनीति : प्रशांत महासागर में मजबूत होगी सैन्य और समुद्री मौजूदगी

ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका समेत QUAD देशों ने फिजी में एक रणनीतिक बंदरगाह विकसित करने पर सहमति जताई है। इस कदम को प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है। नई दिल्ली में हुई QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में यह घोषणा की गई, जिसमें एस. जयशंकर, मार्को रूबियो , पेनी वोंग और तोशिमित्सु मोतेगी शामिल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार फिजी में बंदरगाह बनने से QUAD देशों की समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक क्षमता और रणनीतिक उपस्थिति मजबूत होगी। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को काउंटर करने की दिशा में बड़ा भू-राजनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे भारत की समुद्री और रणनीतिक ताकत भी बढ़ेगी।

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प्रकाशित: 26 May 2026, 05:33 PM · अपडेट: 13 Oct 2026, 10:34 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अब QUAD देशों ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने फिजी में एक महत्वपूर्ण बंदरगाह विकसित करने पर सहमति जताई है। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने की दिशा में QUAD की सबसे बड़ी सामरिक पहलों में से एक माना जा रहा है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई। बैठक में पेनी वोंग, एस. जयशंकर ,तोशिमित्सु मोतेगी और मार्को रूबियो शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रशांत महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने और फिजी में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना का ऐलान किया गया।

फिजी बंदरगाह

फिजी  प्रशांत महासागर के बीच स्थित एक बेहद रणनीतिक द्वीपीय देश है। यह क्षेत्र लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में चीन ने यहां आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ाया है। फिजी में बंदरगाह विकसित होने से QUAD देशों को प्रशांत महासागर में लॉजिस्टिक, समुद्री निगरानी और रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना केवल व्यापारिक या नागरिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भविष्य की सामरिक जरूरतों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

चीन की चिंता

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने प्रशांत द्वीप देशों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। बंदरगाह, एयरपोर्ट, सड़क और सरकारी परियोजनाओं के जरिए बीजिंग ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है। चीन की “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” के तहत कई द्वीपीय देशों के साथ समझौते भी हुए हैं। ऐसे में QUAD देशों का फिजी में संयुक्त बंदरगाह परियोजना पर आगे बढ़ना चीन के लिए रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम चीन को यह संदेश देता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में केवल चीन का प्रभाव नहीं रहेगा और QUAD देश भी यहां अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखेंगे।

सैन्य रणनीति का हिस्सा है

हालांकि QUAD देशों ने इस परियोजना को आधिकारिक रूप से आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग बताया है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञ इसे व्यापक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा मान रहे हैं।  किसी भी बड़े बंदरगाह का उपयोग भविष्य में नौसैनिक लॉजिस्टिक्स, आपदा राहत, समुद्री निगरानी और सैन्य सप्लाई के लिए किया जा सकता है। इसलिए यह परियोजना केवल विकास कार्य नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण  है।

अमेरिका ने कहा

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि QUAD देश प्रशांत द्वीपों में बंदरगाह क्षमता बढ़ाने के लिए साझेदारी करेंगे। उन्होंने कहा कि फिजी के साथ मिलकर पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा बेहतर हो सके। रूबियो ने यह भी संकेत दिया कि प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करना QUAD देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारत के लिए इसका महत्व

भारत लंबे समय से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। फिजी में बंदरगाह परियोजना भारत को प्रशांत महासागर क्षेत्र में नई रणनीतिक पहुंच दे सकती है।  इससे भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की निगरानी और क्षेत्रीय साझेदारी मजबूत होगी। साथ ही यह भारत की “एक्ट ईस्ट” और इंडो-पैसिफिक नीति को भी मजबूती देगा। भारत पहले से हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहा है। अब प्रशांत महासागर में QUAD के जरिए सक्रिय भूमिका भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।

QUAD की  भूमिका

क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (QUAD) को पिछले कुछ वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। यह समूह समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, साइबर सुरक्षा, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है। फिजी बंदरगाह परियोजना QUAD के सहयोग को अब जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है।

प्रशांत महासागर में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

फिजी में बंदरगाह परियोजना की घोषणा ऐसे समय हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी जहां चीन के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं चीन लगातार आर्थिक निवेश और समुद्री विस्तार के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में प्रशांत महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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