छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा से शराब बिक्री में मिलावट का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान (अंग्रेजी शराब दुकान) में लंबे समय से ग्राहकों को नकली तरीके से ब्रांडेड शराब बेचने का खेल चल रहा था। आबकारी विभाग की औचक कार्रवाई में इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
यह कार्रवाई 25 मई 2026 को आबकारी विभाग की विशेष टीम द्वारा की गई। टीम जैसे ही पिथौरा शराब दुकान में पहुंची, अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। कर्मचारियों द्वारा खुलेआम टेबल पर ही मैकडॉवेल नंबर-1 जैसी ब्रांडेड शराब की बोतलों (पाव) की सील तोड़ी जा रही थी और उनमें पानी मिलाकर पुनः बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा था।
आबकारी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर ही चारों कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके से शराब, बोतलें और मिलावट में उपयोग की जा रही सामग्री भी जब्त की गई।
लंबे समय से जमे कर्मचारी बना रहे थे नेटवर्क
जांच में सामने आया कि पकड़े गए कर्मचारियों में उमेश मन्नाडे और करन सोनटके पिछले लगभग 2 वर्षों से इसी दुकान में कार्यरत थे, जबकि नारायण निषाद और हेमंत पटेल करीब 7–8 महीनों से यहां पदस्थ थे।
लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण इन कर्मचारियों के हौसले बुलंद हो गए थे। आरोप है कि ये लोग असली शराब की बोतलों से कुछ मात्रा निकालकर उसमें पानी मिलाते थे और फिर उसी कीमत पर ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई, जांच जारी
आबकारी विभाग ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस मिलावटखोरी के खेल में किसी बड़े नेटवर्क या अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल थी। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में शराब उपभोक्ताओं में नाराजगी और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी पर रोक लग सके।
क्या बोले अधिकारी?
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दुकान संचालन व्यवस्था की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
