धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत महापुराण महोत्सव इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 21 मई से शुरू हुए इस भव्य धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन पूज्य श्री राधा रासबिहारी शरण महाराज द्वारा रायपुर में हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। महोत्सव के तहत अलग-अलग तिथियों में चार प्रमुख महापुराणों की कथाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया है।
वर्तमान में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है, जो 28 मई तक चलेगी। आज यानी 25 मई 2026 को शिव महापुराण कथा का विशेष दिवस माना जा रहा है। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। दूर-दराज गांवों और शहरों से लोग परिवार सहित कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल को आकर्षक विद्युत सजावट, फूलों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा है।
शिव भक्ति
महोत्सव स्थल पर “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष लगातार गूंज रहे हैं। कथा के दौरान भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनके रुद्र अवतार, शिव-पार्वती विवाह, कैलाश धाम, भक्तों पर कृपा और शिव भक्ति के महत्व का विस्तार से वर्णन किया जा रहा है। कथा वाचक अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली से श्रद्धालुओं को शिवमय वातावरण में बांध रहे हैं।ण कथा सुनते समय कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। महिलाएं भजन-कीर्तन में लीन दिखाई दीं, जबकि युवा और बच्चे भी बड़ी संख्या में धार्मिक आयोजन में भाग लेते नजर आए। श्रद्धालुओं का मानना है कि शिव महापुराण कथा सुनने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
महोत्सव में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन
महापुराण महोत्सव केवल कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन सुबह विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और हवन किया जा रहा है। वहीं शाम के समय भजन संध्या और महाआरती का आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत शिव भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूमते नजर आ रहे हैं। कई प्रसिद्ध भजन गायक और कथा वाचक भी इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा स्थल पहुंच रहे हैं, जिसके चलते व्यवस्थाओं को और मजबूत किया गया है।
शिव महापुराण कथा का धार्मिक महत्व
शिव महापुराण हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। इसमें भगवान शिव की महिमा, सृष्टि की उत्पत्ति, धर्म, कर्म, भक्ति और मोक्ष का विस्तृत वर्णन मिलता है। मान्यता है कि शिव महापुराण कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन के दुख-दर्द कम होते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। शिव कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक शिक्षा भी है। इसमें मानव जीवन के मूल्यों, सदाचार, संयम और भक्ति का संदेश दिया जाता है। यही वजह है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी लोग बड़ी संख्या में ऐसे आयोजनों से जुड़ रहे हैं।
धार्मिक संदेश
इस बार महापुराण महोत्सव में युवाओं की भागीदारी भी खास तौर पर देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन की जानकारी तेजी से फैल रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में युवा कथा और भजन कार्यक्रमों में पहुंच रहे हैं। कई युवा स्वयंसेवक के रूप में व्यवस्थाओं में भी सहयोग कर रहे हैं। श्री शिव महापुराण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और मानवता का संदेश दिया जा रहा है। पूज्य श्री राधा रासबिहारी शरण महाराज ने भगवान शिव त्याग, करुणा, सरलता और समानता के प्रतीक हैं। कथा में यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति को अहंकार, क्रोध और लोभ से दूर रहकर सत्य, सेवा और अच्छे कर्मों का मार्ग अपनाना चाहिए। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को यह भी बताया गया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि दूसरों की मदद करना, माता-पिता का सम्मान करना और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखना भी भगवान की आराधना का ही रूप है। कथा के दौरान “हर जीव में शिव” का संदेश देते हुए मानवता और आपसी भाईचारे को सबसे बड़ा धर्म बताया गया।
28 मई तक आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार श्री शिव महापुराण कथा 28 मई तक प्रतिदिन जारी रहेगी। आने वाले दिनों में विशेष पूजा, विशाल भंडारा और समापन महाआरती का भी आयोजन किया जाएगा। समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
