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घर के बाहर लगा डिजिटल स्मार्ट मीटर
घर के बाहर लगा डिजिटल स्मार्ट मीटर
रायपुर

स्मार्ट मीटर : राज्य की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की है देशव्यापी योजना 

राष्ट्रीय पहल, न कि राज्य की योजना छत्तीसगढ़ सहित देश भर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की निजी योजना नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत एक राष्ट्रीय अभियान है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
20 Jun 2026, 01:01 PM
रायपुर

स्मार्ट मीटर को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं, लेकिन सच यह है कि यह किसी एक राज्य सरकार की अपनी अलग योजना नहीं है। यह असल में भारत सरकार की 'पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना' (RDSS) का हिस्सा है, जिसे पूरे देश में एक राष्ट्रीय पहल के रूप में लागू किया गया है। छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य राज्यों में जो स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, वे केंद्र सरकार के तय मानकों और गाइडलाइंस के तहत ही लग रहे हैं। राज्य सरकारें इस केंद्रीय योजना को जमीन पर उतारकर बिजली सप्लाई व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, आधुनिक और जनता के लिए सुविधाजनक बनाने का काम कर रही हैं।

कब और क्यों शुरू हुई यह योजना

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में पूरे देश में स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया था। इस बड़े कदम के पीछे मुख्य मकसद बिजली कंपनियों की काम करने की क्षमता को बेहतर बनाना और तकनीकी व कमर्शियल नुकसान को कम करना है। इसके साथ ही, योजना का सीधा फायदा आम जनता को भी मिलना है, जिससे उन्हें बिना किसी रुकावट के अच्छी क्वालिटी की बिजली मिल सके और उनके घरों का बिजली बिल पूरी तरह सटीक और सही आए।

बिजली संकट और वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत

तकनीकी मोर्चे पर देखें तो स्मार्ट मीटर से बिजली के लोड, वोल्टेज और खपत की रियल-टाइम जानकारी (लाइव डेटा) मिलती रहती है। इसका फायदा यह है कि बिजली विभाग को ग्रिड या नेटवर्क की मौजूदा स्थिति का लगातार पता रहता है। अगर कहीं ओवरलोडिंग हो रही हो या वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या आ रही हो, तो विभाग को तुरंत इसकी जानकारी मिल जाती है और वे समय रहते इसे ठीक कर लेते हैं। नतीजा यह होता है कि उपभोक्ताओं को बिना ट्रिपिंग के लगातार बिजली मिलती है।

विभाग का साफ संदेश

ऊर्जा विभाग ने इस मामले पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य जनता पर किसी भी तरह का आर्थिक बोझ डालना बिल्कुल नहीं है। इसका असली मकसद बिजली सप्लाई के पूरे सिस्टम को पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक तकनीक से लैस बनाना है, ताकि गड़बड़ियों को रोका जा सके। यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह से केंद्र सरकार की योजना और उनकी गाइडलाइंस के तहत ही संचालित की जा रही है। 

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