दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस बीच, प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने सरकार को सीधे तौर पर बातचीत करने की सलाह दी है। हजारे का कहना है कि 20 दिनों तक अनशन पर रहने के बाद किसी व्यक्ति के सब्र की परीक्षा लेना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
अन्ना हजारे का सरकार को सीधा संदेश
अन्ना हजारे ने जोर देकर कहा कि संवाद ही लोकतंत्र का आधार है और किसी भी समस्या का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वांगचुक की मांगों को लेकर चाहे 'हाँ' कहें या 'ना', लेकिन एक बार वार्ता जरूर होनी चाहिए। हजारे के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबी अवधि तक गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखता है, तो सरकार का यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह उनकी बात को गंभीरता से सुने और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे।