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तरणलाल में बैगा बच्चे तैराकी प्रशिक्षण लेते हुए
तरणलाल में बैगा बच्चे तैराकी प्रशिक्षण लेते हुए
राज्य सरकार

तैराकी में छलांग :  पेण्ड्रा के तरणताल में गूंज रहा आत्मविश्वास, राष्ट्रीय प्रशिक्षकों से मिल रहा आधुनिक प्रशिक्षण

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेण्ड्रा तरणताल में आयोजित ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर बैगा समुदाय के बच्चों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस शिविर में विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को तैराकी का आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Jun 2026, 05:14 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 11:48 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों के बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। जंगलों और पहाड़ों में रहने वाले ये बच्चे अब आधुनिक खेल कौशल की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा यह विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है।

बच्चों का आत्मविश्वास

नदी-नालों और प्राकृतिक जलस्रोतों के बीच जीवन बिताने वाले इन बच्चों के लिए तरणताल का अनुभव बिल्कुल नया है। यहां वे केवल तैरना ही नहीं सीख रहे, बल्कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी भावना को भी समझ रहे हैं। बच्चों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतने बड़े स्वीमिंग पूल में अभ्यास नहीं किया था और अब वे इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं। इस ग्रीष्मकालीन शिविर में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक बच्चों को तैराकी की बारीकियां सिखा रहे हैं। फ्री-स्टाइल, बैक-स्ट्रोक, बटरफ्लाई, ब्रेस्ट-स्ट्रोक और मेडले जैसी प्रतिस्पर्धी विधाओं का नियमित अभ्यास कराया जा रहा है।

 क्षमता को मिल रहा सही मंच

प्रशिक्षकों का मानना है कि बैगा बच्चों में स्वाभाविक सहनशक्ति, साहस और सीखने की तीव्र क्षमता होती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पले-बढ़े ये बच्चे यदि उचित मार्गदर्शन और संसाधन पाएं, तो राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण शिविर केवल खेल गतिविधि नहीं बल्कि जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक समावेशन को भी मजबूती मिल रही है। यह प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहा है।

विकास नीति का प्रभाव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास के अवसरों को जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। यह शिविर उसी समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण है। कभी जंगलों और पहाड़ियों तक सीमित रहने वाले बैगा बच्चे आज आत्मविश्वास के साथ तरणताल में नई लहरों को चुनौती दे रहे हैं। यह परिवर्तन केवल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रयास, सरकारी नीति और बच्चों की मेहनत का संयुक्त परिणाम है।

उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ता कदम

यह ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर बैगा बच्चों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो रहा है। आने वाले समय में यही बच्चे राज्य और देश का प्रतिनिधित्व कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास लगातार तेज हो रहे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में आयोजित यह ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चों के लिए अवसरों का नया द्वार खोल रहा है।

आधुनिक प्रशिक्षण

नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस विशेष शिविर में बैगा समुदाय के बच्चों को प्राथमिकता दी गई है प्रशासनिक अधिकारियों ने दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर परिवारों को प्रेरित किया और बच्चों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। नदी-नालों और जंगलों के बीच रहने वाले इन बच्चों के लिए तरणताल में प्रशिक्षण एक नया अनुभव है। यहां वे तैराकी सीखने के साथ-साथ अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास भी विकसित कर रहे हैं। बच्चों में उत्साह है कि वे बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा सकें।

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