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राम माधव और राहुल गांधी
राम माधव और राहुल गांधी
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आरएसएस पर राहुल गांधी का तीखा वार : ‘राष्ट्रीय सरेंडर संघ’ बयान से सियासत गरमाई

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने Rashtriya Swayamsevak Sangh पर हमला बोलते हुए उसे “राष्ट्रीय सरेंडर संघ” कहा है। यह बयान आरएसएस नेता Ram Madhav के अमेरिका में दिए एक कथित बयान और बाद में उसके स्पष्टीकरण के बाद आया। राहुल गांधी ने दावा किया कि इस घटना ने आरएसएस की सोच और कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
25 Apr 2026, 07:07 PM
दिल्ली

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने आरएसएस को “राष्ट्रीय सरेंडर संघ” करार देते हुए संगठन पर विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह बयान आरएसएस नेता राम माधव के एक हालिया कथित बयान और उसके बाद किए गए स्पष्टीकरण को लेकर आया है।

अमेरिका में दिए बयान से शुरू हुआ विवाद

मामला उस समय तूल पकड़ गया जब राम माधव ने अमेरिका के हडसन इंस्टिट्यूट में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की विदेश नीति और वैश्विक संबंधों को लेकर टिप्पणी की थी। अपने बयान में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि भारत ने ईरान से तेल खरीद बंद करने पर सहमति जताई, रूस से तेल खरीद को लेकर भी रुख बदला और साथ ही अमेरिका के टैरिफ जैसे मुद्दों पर भी सहमति दिखाई। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद राम माधव ने बाद में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके बयान में कुछ तथ्यात्मक त्रुटियां थीं और इसका आशय गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

राहुल गांधी का तीखा प्रहार

इसी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “राष्ट्रीय सरेंडर संघ।नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद, अमेरिका में शुद्ध गुलामी।” उन्होंने आगे दावा किया कि राम माधव के बयान ने आरएसएस की असल सोच और कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम देश की विदेश नीति और निर्णय प्रक्रिया में स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है।

कांग्रेस का भी हमला

कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और आरएसएस को घेरने की कोशिश की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता K. C. Venugopal ने एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के वरिष्ठ नेता के बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार विदेश नीति के मामलों में दबाव में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि एक समय भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद अपनी स्वतंत्र नीति दिखाई थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और देश की संप्रभुता पर सवाल उठ रहे हैं।

कर्नाटक कांग्रेस का भी हमला

इसी बीच Indian National Congress की कर्नाटक इकाई ने भी सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पोस्ट में कहा गया कि भाजपा और आरएसएस नेताओं के बयान सरकार की विदेश नीति की दिशा और निर्णयों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि “कभी अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा रहने वाला आरएसएस आज वैश्विक शक्तियों के आगे झुकने की स्थिति में दिखाई देता है।”

राजनीतिक माहौल गरमाया

इस पूरे विवाद के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष इसे विदेश नीति की कमजोरी और “समझौता नीति” के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकते हैं। वहीं, विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उठे सवालों ने बहस को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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