Wednesday, 28 Oct 2026 भारत
ब्रेकिंग
Bilaspur News: कोर्ट के दो पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर दस्तावेज दिखाने का आरोप, वीडियो वायरल NRC CG: नंदिनी कुमान में 4 महीने में 5 बच्चों की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने तेज की जांच Job Fraud: परिवहन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, पुलिस ने दर्ज किया केस Accident News: पावर हाउस ओवरब्रिज से गिरने पर युवती की मौत, जांच में जुटी पुलिस Bilaspur News: दूध, घी और पनीर के सैंपल फेल, दीपावली से पहले खाद्य विभाग सख्त Crime News: कवर्धा में बड़ी लूट, बाइक सवार बदमाशों ने व्यापारी को बनाया निशाना Bilaspur News: कोर्ट के दो पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर दस्तावेज दिखाने का आरोप, वीडियो वायरल NRC CG: नंदिनी कुमान में 4 महीने में 5 बच्चों की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने तेज की जांच Job Fraud: परिवहन विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, पुलिस ने दर्ज किया केस Accident News: पावर हाउस ओवरब्रिज से गिरने पर युवती की मौत, जांच में जुटी पुलिस Bilaspur News: दूध, घी और पनीर के सैंपल फेल, दीपावली से पहले खाद्य विभाग सख्त Crime News: कवर्धा में बड़ी लूट, बाइक सवार बदमाशों ने व्यापारी को बनाया निशाना
W 𝕏 f
होम › सेहत › कुपोषण और एनीमिया : बच्चों व महिलाओं के लिए गंभीर…
AI फोटो
AI फोटो
सेहत

कुपोषण और एनीमिया : बच्चों व महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट

भारत में कुपोषण और एनीमिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं, जिनका सबसे अधिक असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग और कमजोर विकास की समस्या व्यापक है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएँ एनीमिया से ग्रसित हैं। कुपोषण का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी, आयरन और पोषक तत्वों का अभाव, गरीबी, स्वच्छता की कमी और जागरूकता की कमी है। इसका प्रभाव बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य की उत्पादकता पर पड़ता है, वहीं महिलाओं में कमजोरी, गर्भावस्था की जटिलताएँ और मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ता है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 05 May 2026, 04:45 PM · अपडेट: 03 Oct 2026, 01:22 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
देश में कुपोषण और एनीमिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। हल की  रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम आयु के करीब 35% से अधिक बच्चे स्टंटिंग (बौनेपन) का शिकार हैं, जो लंबे समय तक पोषण की कमी का संकेत है वहीं महिलाओं में एनीमिया की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है, जहां लगभग 57% महिलाएं खून की कमी से ग्रसित पाई गई हैं।

बच्चों और माताओ पर असर 

विशेषज्ञों के अनुसार कुपोषण केवल शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भविष्य की उत्पादकता को भी प्रभावित करता है। कुपोषण से ग्रसित बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो जाती है मानसिक रूप से कमजोर होते है और  वे बार-बार बीमार पड़ते हैं। वहीं एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में कमजोरी, थकान, गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं और मातृ मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है।

कुपोष एनीमिया के कारण 

इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। इनमें संतुलित आहार की कमी, आयरन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी, गरीबी, जागरूकता का अभाव, साफ पानी और स्वच्छता की कमी प्रमुख हैं। कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि देश में बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी दैनिक आयरन की जरूरत पूरी नहीं कर पातीं, जिससे एनीमिया तेजी से फैल रहा है बच्चों में भी शुरुआती उम्र में सही पोषण न मिलना इस समस्या को और गंभीर बना देता है।

पोषण अभियान 

सरकार द्वारा पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को सुधारना है। इन योजनाओं के तहत आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट, मिड-डे मील, आंगनबाड़ी सेवाएं और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजनाएं ही काफी नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर इनके प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, आयरन और विटामिन सप्लीमेंट का सेवन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही समाज और परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जहां बच्चों और महिलाओं के पोषण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट 

विश्व स्वास्थ्य संगठन  की रिपोर्ट के अनुसार कुपोषण और एनीमिया की स्थिति केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन  के मुताबिक भारत दुनिया के कुल कुपोषण के बोझ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वहन करता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन  की ग्लोबल एनीमिया रिपोर्ट 2021 के अनुसार, महिलाओं और बच्चों में एनीमिया के मामले चिंताजनक स्तर पर हैं। 
रिपोर्ट बताती है कि प्रजनन आयु 15  से 49  वर्ष की बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, और यह समस्या पिछले दो दशकों में लगातार बनी हुई है। WHO की रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि कुपोषण और एनीमिया केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय और वैश्विक विकास की चुनौती है, जिस पर तत्काल और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

WHO के आंकड़ों के अनुसार भारत में 

5 साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया की दर 57% से अधिक दर्ज की गई है ,हिलाओं में भी एनीमिया का स्तर 50% से ज्यादा पाया गया है  HO यह भी स्पष्ट करता है कि कुपोषण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि पोषक तत्वों की कमी का परिणाम है, जिसमें आयरन, विटामिन और मिनरल्स की कमी प्रमुख कारण होती है। संगठन के अनुसार, खराब आहार, स्वच्छता की कमी, संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच इस समस्या को और बढ़ाते हैं। 
WHO ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास, शिक्षा और देश की आर्थिक उत्पादकता पर दीर्घकालिक असर डालेगा। इसलिए WHO ने देशों को संतुलित आहार, आयरन सप्लीमेंट, मातृ-शिशु देखभाल और पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने की सिफारिश की है।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें