चंबल अंचल में अवैध रेत उत्खनन और पुलिस की सांठगांठ की कहानियां नई नहीं हैं, लेकिन मुरैना जिले से जो ताजा मामला सामने आया है, उसने खाकी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवागत पुलिस अधीक्षक (SP) धर्मराज मीणा के पदभार संभालते ही जहां एक तरफ पुलिस अपराधियों पर शिकंजा कसने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दिमनी थाना पुलिस की एक 'कथित' कार्रवाई अब खुद पुलिस महकमे के लिए गले की हड्डी बन गई है।
बुधवार (20 मई) की शाम को पुलिस ने बाकायदा एक प्रेस नोट जारी कर अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पुलिस की इस "बहादुरी की कहानी" की हवा निकाल दी।
बुधवार शाम दिमनी थाना पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, पुलिस टीम ने बघपुरा घाट पर मुखबिर की सूचना पर दबिश दी थी। पुलिस का दावा था कि वहां बड़े पैमाने पर प्रतिबंधात्मक चंबल रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। पुलिस को देखकर रेत माफिया भाग खड़े हुए, लेकिन मुस्तैद पुलिस ने मौके से अवैध रेत खनन में लगा करीब 10 लाख रुपये की कीमत का एक हाईटेक लोडर जब्त कर लिया। इस बड़ी कामयाबी को नवागत एसपी धर्मराज मीणा के 'जीरो टॉलरेंस' नीति के असर के रूप में पेश किया गया।
वायरल वीडियो ने पलटी बाजी
क्या है वायरल वीडियो में? वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस लोडर को पुलिस बघपुरा घाट से अवैध रेत उत्खनन करते हुए पकड़ने का दावा कर रही है, वह वास्तव में एक गांव में खड़ा है। वहां वह चंबल की रेत नहीं, बल्कि ग्रामीणों के घर के बाहर लगा गोबर का घूरा (खाद का ढेर) भर रहा है। वीडियो में दिमनी थाना पुलिस के जवान उसी गोबर के ढेर के पास से लोडर को अपने कब्जे में लेते दिखाई दे रहे हैं।
कार्रवाई पर उठ रहे 3 बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिमनी पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय जनता और बुद्धिजीवियों के बीच तीन बातें प्रमुखता से चर्चा में हैं:
स्पॉट की तस्वीरें गायब क्यों?: अमूमन जब भी पुलिस रेत माफियाओं के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करती है, तो मौके (चंबल घाट) की तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के तौर पर जारी किए जाते हैं। लेकिन इस मामले में पुलिस ने सिर्फ थाने परिसर में खड़े लोडर की तस्वीरें ही क्यों जारी कीं? पुलिस मौके की तस्वीरें दिखाने से क्यों बच रही है?
टारगेट या सैटिंग का खेल?: क्या पुलिस ने अपनी वाहवाही लूटने या आलाधिकारियों को दिखाने के लिए किसी सीधे-साधे ग्रामीण के कृषि कार्य में लगे वाहन को 'रेत माफिया' का तमगा दे दिया? या फिर असली माफियाओं को वीआईपी एस्केप (रास्ता) देकर इस लोडर को मोहरा बनाया गया?
बाकी घाटों पर मेहरबानी क्यों?: स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि अगर पुलिस वाकई अवैध रेत उत्खनन को लेकर गंभीर है, तो दिमनी इलाके के अन्य सक्रिय और बड़े घाटों पर सन्नाटा क्यों है? वहां ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं दिखती?
नवागत SP की सख्त छवि को धूमिल कर रही जमीनी हकीकत
अब देखना यह होगा कि:
क्या एसपी धर्मराज मीणा इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर दिमनी थाना पुलिस के खिलाफ कोई निष्पक्ष जांच करवाएंगे?
क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
फिलहाल, इस 'रेत बनाम गोबर' वाले मामले ने सोशल मीडिया से लेकर जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जनता अब पुलिस के अगले कदम और उनकी 'पारदर्शिता' के दावों की असलियत का इंतजार कर रही है।
