छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पुलिस आरक्षक
भर्ती को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया और फाइनल चयन
सूची को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों युवाओं को
बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से इस भर्ती प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार
कर रहे थे।
भर्ती रद्द नहीं, जांच के दिए निर्देश
हाई कोर्ट के जस्टिस पी.पी. साहू की
सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में कोई व्यापक गड़बड़ी साबित
नहीं हुई है, इसलिए इसे निरस्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों की जांच कराने के
निर्देश दिए हैं। यदि जांच में वे दोषी पाए जाते हैं, तो केवल उनके चयन को रद्द किया जाएगा, न कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को।
वेटिंग लिस्ट से भरे जाएंगे खाली पद
अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश
दिया है कि चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग के बाद जो पद खाली रह जाएंगे, उन्हें वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों से
भरा जाए। कोर्ट ने माना कि केवल मुख्य चयन सूची के आधार पर सभी पदों
को भर पाना संभव नहीं है, इसलिए यह व्यवस्था जरूरी है।
क्या था पूरा मामला?
वर्ष 2024 में पुलिस विभाग ने करीब 5,967 आरक्षक पदों पर
भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कई
अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों से आवेदन किया और मेरिट में आने के कारण वे
अलग-अलग जिलों की चयन सूची में शामिल हो गए। इससे वास्तविक रूप से कई पद खाली रह
गए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि 5,948 उम्मीदवारों की चयन सूची जारी की गई है, लेकिन एक ही उम्मीदवार का एक से अधिक
स्थानों पर चयन होना संभव है।
युवाओं के लिए क्या मायने?
इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया में
पारदर्शिता बनी रहेगी और योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा। साथ ही, वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों के लिए भी
अब नौकरी पाने की उम्मीद बढ़ गई है, क्योंकि खाली पदों को उसी सूची से भरा
जाएगा। यह निर्णय छत्तीसगढ़ में रोजगार प्रक्रिया को गति देने और युवाओं के विश्वास
को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
