पश्चिम एशिया में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से बदले भू-राजनीतिक हालात ने खाड़ी देशों की रणनीतिक सोच को भी प्रभावित किया है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव, ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE अब अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नए स्तर पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में भारत और UAE के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को लेकर नई संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 15 मई को प्रस्तावित UAE यात्रा से पहले दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को लेकर कूटनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। माना जा रहा है कि अबू धाबी में UAE के राष्ट्रपतिमोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने वाली बैठक में रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सकती है। भारत और UAE के रिश्ते अब केवल ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
पश्चिम एशिया में बदलते हालात और नई रणनीतिक सोच
हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया कई बड़े भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहा है। क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, ड्रोन तकनीक का सैन्य इस्तेमाल, ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर खतरे जैसी चुनौतियों ने खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित किया है। अब खाड़ी देश पारंपरिक सुरक्षा ढांचे के साथ-साथ बहुआयामी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां विकसित करना चाहते हैं। इसी कारण भारत जैसे देशों के साथ सहयोग को नए नजरिए से देखा जा रहा है। UAE लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और आधुनिक सुरक्षा संरचना पर जोर देता रहा है। ऐसे में भारत के साथ बढ़ता रणनीतिक सहयोग दोनों देशों के साझा हितों से जुड़ा माना जा रहा है।
भारत और UAE के रिश्तों में आया बड़ा बदलाव
पिछले एक दशक में भारत और UAE के संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां दोनों देशों के रिश्तों की पहचान तेल व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय से होती थी, वहीं अब यह साझेदारी रक्षा, टेक्नोलॉजी, निवेश, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और रणनीतिक सहयोग तक फैल चुकी है। भारत UAE का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू होने के बाद व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिली है। इसके अलावा आतंकवाद विरोधी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करना और संगठित अपराध से निपटने में भी दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ा है। यही वजह है कि भारत-UAE संबंधों को अब “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले एक दशक में भारत और UAE के संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां दोनों देशों के रिश्तों की पहचान तेल व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय से होती थी, वहीं अब यह साझेदारी रक्षा, टेक्नोलॉजी, निवेश, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और रणनीतिक सहयोग तक फैल चुकी है। भारत UAE का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू होने के बाद व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिली है। इसके अलावा आतंकवाद विरोधी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करना और संगठित अपराध से निपटने में भी दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ा है। यही वजह है कि भारत-UAE संबंधों को अब “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा सहयोग क्यों बन रहा अहम मुद्दा
बदलते वैश्विक हालात में रक्षा और सुरक्षा सहयोग किसी भी रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक बड़ी समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। वहीं UAE पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक तथा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश माना जाता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक सहयोग, साइबर सुरक्षा और समुद्री निगरानी को लेकर लगातार बातचीत हो रही है।
NSA अजीत डोभाल की यात्रा
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हाल ही में अबू धाबी का दौरा किया था। इस यात्रा को दोनों देशों के सुरक्षा संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया। सूत्रों के अनुसार इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीति, साइबर सुरक्षा और नई रक्षा व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि NSA स्तर की बातचीत इस बात का संकेत है कि दोनों देश सुरक्षा सहयोग को और संस्थागत रूप देना चाहते हैं। भारत और UAE दोनों ही क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद लगातार मजबूत हो रहा है।
हिंद महासागर और समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और UAE के बीच समुद्री सुरक्षा आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण सहयोग क्षेत्रों में से एक हो सकता है।भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इसका अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों के जरिए होता है। ऐसे में अरब सागर, हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता भारत के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा, एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन, ड्रोन निगरानी और नौसैनिक सहयोग में दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत हो सकती है।
साइबर सुरक्षा और नई तकनीक पर भी फोकस
आज के दौर में सुरक्षा सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही। साइबर अटैक, डिजिटल जासूसी और AI आधारित सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। भारत और UAE दोनों ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट टेक्नोलॉजी में बड़े निवेश कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा, AI आधारित निगरानी प्रणाली और स्मार्ट डिफेंस टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दोनों देश रक्षा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर भी काम कर सकते हैं।
ऊर्जा और निवेश संबंध भी बन रहे मजबूत
भारत और UAE के रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी ऊर्जा और निवेश सहयोग रहा है। UAE भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। इसके अलावा UAE की कई बड़ी कंपनियां भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश कर रही हैं। भारत भी UAE को पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और कई नए निवेश समझौते भी चर्चा में हैं।
भारत और UAE के बीच भारतीय समुदाय बना मजबूत कड़ी
UAE में रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। लाखों भारतीय वहां काम करते हैं और UAE की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं। UAE सरकार ने भी भारतीय समुदाय के लिए सकारात्मक नीतियां अपनाई हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। है कि लोगों के बीच मजबूत संबंध किसी भी रणनीतिक साझेदारी को दीर्घकालिक मजबूती देते हैं।
पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पश्चिम एशिया में संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति अपनाई है। भारत के संबंध UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान और इजराइल जैसे देशों के साथ मजबूत हुए हैं। भारत अब सिर्फ ऊर्जा आयातक देश के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, सैन्य क्षमता और वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव ने खाड़ी देशों का भरोसा बढ़ाया है।
पीएम मोदी की यात्रा पर दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की UAE यात्रा को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि इस दौरान कई अहम समझौतों और सहयोगी पहलों पर चर्चा हो सकती है। यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाएगी। भारत और UAE के बीच मजबूत होते संबंध यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर और अधिक करीबी साझेदार बन सकते हैं।

