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बरगी बांध हादसे के बाद बचाओ कार्य जारी
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बरगी की लहरों में दफ्न सच : अंदर एक जिंदा है…जबलपुर से उठी एक दिल दहला देने वाली आवाज

अंदर एक जिंदा है की पुकार ने खोली सिस्टम की नाकामी,दजबलपुर के बरगी डैम हादसे में 9 मौतों ने सिस्टम की लापरवाही उजागर की। एयर पॉकेट में 3 घंटे फंसे रियाज हुसैन की जिंदादिली और स्टाफ की कथित लापरवाही के आरोपों ने सवाल खड़े किए कि आखिर सुरक्षा इंतजाम क्यों नाकाम रहे?

डॉ. नीरज गजेंद्र
प्रकाशित: 02 May 2026, 09:14 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 02:08 AM
जबलपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

जबलपुर से उठी एक दिल दहला देने वाली आवाज.. अंदर एक जिंदा है…ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बरगी डैम में हुए भीषण हादसे ने सिर्फ 9 जिंदगियां नहीं छीनीं, सिस्टम की लापरवाही की परतें भी खोल दी हैं। हादसे की तस्वीरें सामने आते ही हर आंख नम है। 9 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 9 को रेस्क्यू कर लिया गया। लेकिन इन आंकड़ों के बीच सबसे मार्मिक कहानी है 70 वर्षीय रियाज हुसैन की, जो मौत के साए से लौटे हैं।

रियाज बताते हैं कि शुरुआत के 30 मिनट सब सामान्य था। फिर अचानक आए तूफान ने सबकुछ बदल दिया। क्रूज बुरी तरह डगमगाया, पानी अंदर घुसने लगा और कुछ ही पलों में पूरा जहाज पलट गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि अब तक यह स्पष्ट नहीं कि क्रूज में कुल कितने लोग सवार थे।

क्रूज के निचले हिस्से, एसी चेंबर में फंसे रियाज के लिए हर सेकंड मौत के करीब ले जा रहा था। चारों ओर चीख-पुकार, फिर अचानक सन्नाटा। 5 मिनट में सब खत्म हो गया… सिर्फ खामोशी बची थी, उनकी आवाज आज भी सिहरन पैदा करती है।

पानी के भीतर फंसे रियाज को एक छोटा सा एयर पॉकेट मिला और वही उनकी जिंदगी की आखिरी उम्मीद बन गया। उसी संकरी जगह में उन्होंने 3 घंटे तक मौत से जंग लड़ी। ऊपर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था, नीचे एक जिंदगी उम्मीद से चिपकी थी। जैसे ही कोई आहट हुई, रियाज ने पूरी ताकत से दीवार पीटना शुरू किया। और फिर गूंजी वो आवाज एक जन जिंदा है अंदर!

इसके बाद रेस्क्यू टीम ने उन्हें बाहर निकाला। रियाज बच गए… लेकिन उनकी पत्नी और बेटी इस हादसे में हमेशा के लिए खो गईं। सबसे हैरान करने वाली बात यात्रियों को शुरुआत में लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई।
रोशन के मुताबिक, जब क्रूज डूबने लगा, तब मैंने खुद नीचे जाकर जैकेट निकाली और लोगों को बांटी।

 

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