छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित Bastar संभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां नक्सल संगठन को करारा झटका लगा है। लंबे समय से सक्रिय और सबसे खतरनाक मानी जाने वाली PLGA बटालियन नंबर-1 के कमांडर Sodhi Kasha ने अपने साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है। इस घटना को बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
21 PLGA और 10 DKSZC सदस्य भी मुख्यधारा में लौटे
सूत्रों के मुताबिक 10 अप्रैल को Hyderabad में हुए इस बड़े सरेंडर में सोढ़ी कैशा के साथ PLGA के 21 सदस्य और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 10 सदस्य शामिल हैं।
यह सरेंडर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद DKSZC का कोई बड़ा शीर्ष सदस्य सक्रिय नहीं बचा है।
1995 से जुड़ा था नक्सल संगठन से
सोढ़ी कैशा सुकमा जिले का रहने वाला है और वर्ष 1995 से नक्सल संगठन से जुड़ा हुआ था। हाल ही में उसे PLGA बटालियन नंबर-1 का इंचार्ज बनाया गया था।
यह बटालियन नक्सलियों की सबसे मजबूत और खूंखार यूनिट मानी जाती थी, जिसने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया था और सुरक्षा बलों के लिए लंबे समय तक चुनौती बनी रही।
नक्सलियों की रीढ़ मानी जाती थी बटालियन नंबर-1
PLGA बटालियन नंबर-1 को नक्सल संगठन की रीढ़ कहा जाता था।
- बड़े और सुनियोजित हमलों में शामिल
- दंडकारण्य क्षेत्र में मजबूत पकड़
- सुरक्षा बलों के खिलाफ कई ऑपरेशनों का नेतृत्व
इस बटालियन के कमजोर पड़ने से नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
IG का संदेश: हिंसा छोड़ें, मुख्यधारा में लौटें
इस बड़े सरेंडर के बाद पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने शेष नक्सलियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि—
- अब भी आत्मसमर्पण का अंतिम मौका है
- सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं
- हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की धारा में शामिल हों
बस्तर में नक्सलवाद का अंत करीब?
लगातार हो रहे सरेंडर और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या बस्तर अब नक्सल मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के कमजोर होने से नक्सल संगठन की संरचना बिखर रही है, लेकिन पूरी तरह समाप्ति के लिए अभी सतत कार्रवाई और सतर्कता जरूरी होगी।
