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ममता बनर्जी का कड़ा रूख
ममता बनर्जी का कड़ा रूख
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महामंथन : जाना है तो अभी जाएं..., चुनावी हार के बाद बगावती सुरों पर ममता बनर्जी का अब तक का सबसे कड़ा रुख

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। कोलकाता में हुई अहम समीक्षा बैठक में Mamata Banerjee ने असंतुष्ट नेताओं को साफ संदेश देते हुए कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे बिना हिचक जा सकते हैं। पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे, चुनावी रणनीति और Abhishek Banerjee की टीम की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।

कीर्तिमान न्यूज
16 May 2026, 01:23 PM
कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचा घमासान अब चरम पर पहुंच गया है। पार्टी के भीतर लगातार सुलग रही बगावत और नेताओं के पाला बदलने के सिलसिले के बीच, पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

कोलकाता में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक में ममता बनर्जी ने असंतुष्ट नेताओं को दोटूक शब्दों में 'एग्जिट गेट' (बाहर का रास्ता) दिखा दिया है।

ममता का साफ संदेश

कोलकाता की इस अहम बैठक में ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष पर चुप्पी तोड़ते हुए साफ कह दिया कि जो लोग जाना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं। सूत्रों के मुताबिक, ममता ने बेहद सख्त लहजे में कहा:

"अगर किसी को लगता है कि उसका भविष्य कहीं और सुरक्षित है या वह किसी अन्य दल में जाना चाहता है, तो वह तुरंत जा सकता है। मैं किसी को रोकने के लिए हाथ नहीं जोड़ने वाली। मुश्किल वक्त में जो साथ नहीं रह सकते, उनके भरोसे संगठन नहीं चलाया जा सकता।"

ममता बनर्जी का यह बयान उस समय आया है जब कई विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने या तो पार्टी से दूरी बना ली है या फिर उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हैं।

हार के बाद TMC में अंदरूनी कलह

चुनाव नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर का अंतर्विरोध खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ गया है। पार्टी के अंदर मुख्य रूप से इन बातों को लेकर खींचतान मची है:

  • रणनीति और टिकट बंटवारे पर सवाल: कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर टिकट बांटे गए और चुनावी रणनीति में भारी चूक हुई।

  • अभिषेक बनर्जी की टीम पर निशाना: दबी जुबान में और कुछ नेताओं द्वारा परोक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी (पार्टी के सेकेंड-इन-कमांड) की कार्यशैली और उनकी युवा टीम की रणनीतियों को इस हार का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

  • नेताओं की बैठक से दूरी: कई बड़े चेहरों और विधायकों का इस अहम समीक्षा बैठक में शामिल न होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि अंदरूनी नाराजगी बहुत गहरी है।


अब सर्जरी की तैयारी में ममता

ममता बनर्जी अब पार्टी को पुराने ढर्रे से निकालकर पूरी तरह नए सिरे से खड़ा करने (Rebranding) के मूड में हैं। बैठक में आगामी दिनों के लिए एक सख्त रोडमैप तैयार किया गया है:

1. बूथ स्तर पर 'X-Ray' जांच

TMC नेतृत्व ने तय किया है कि अलग-अलग जिलों में हार के कारणों का पता लगाने के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी। यह टीमें बूथ स्तर पर जाकर रिपोर्ट तैयार करेंगी कि पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक आखिर किस वजह से छिटका।

2. गुटबाजी पर कड़ा एक्शन

सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने वाले और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं की एक सूची तैयार की जा रही है। ममता ने साफ किया है कि अब संगठन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

3. नए चेहरों को मौका

चूंकि कई पुराने और बड़े नेता पार्टी छोड़ने की कगार पर बैठे हैं, इसलिए ममता बनर्जी ने बचे हुए वफादार नेताओं को निर्देश दिया है कि वे जमीन पर उतरें, कार्यकर्ताओं के बीच दोबारा सक्रिय हों और नए व युवा चेहरों को आगे लाएं।

राजनीतिक विश्लेषकों का क्या है मानना

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ममता बनर्जी का यह दांव एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वह खुद को कमजोर दिखाने के बजाय एक कड़क और अनुशासित नेता के रूप में पेश कर रही हैं। वे जानती हैं कि जो नेता अंदर रहकर नुकसान पहुंचा सकते हैं, उनका बाहर जाना ही पार्टी के भविष्य के लिए बेहतर होगा। अब देखना यह है कि ममता के इस 'अल्टीमेटम' के बाद TMC में मची भगदड़ रुकती है या बगावत की आग और भड़कती है।
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