छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक रिटायर्ड डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 1.25 करोड़ रुपए ऐंठने वाले शातिर अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का रायपुर पुलिस ने बड़ा भंडाफोड़ किया है। मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए साइबर सेल की विशेष टीम ने देश के दो अलग-अलग कोनों—दिल्ली और कर्नाटक में छापेमारी कर गिरोह के तीन और मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है। इन्हें ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में करीब दो महीने पहले हरियाणा से एक आरोपी सोमनाथ महतो की गिरफ्तारी हुई थी। उससे मिली कड़ाई से पूछताछ और कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस अब गिरोह के अन्य बड़े चेहरों तक पहुंचने में कामयाब रही है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान और उनका प्रोफाइल
साइबर सेल और विधानसभा थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दबोचे गए आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
आर्यन सिंहजितेंद्र कुमार
राजदीप भाटिया
ये आरोपी बेहद तकनीकी रूप से सक्षम हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे थे।
खुलासा: 18 'म्यूल' बैंक खातों से ₹10.76 करोड़ का देशव्यापी ट्रांजैक्शन
पुलिसिया जांच में जो सबसे चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है, वह है इस गिरोह के वित्तीय साम्राज्य का पैमाना। आरोपियों के पास से मिले 18 'म्यूल' (किराए के/फर्जी) बैंक खातों की जांच करने पर पता चला है कि इनमें अब तक 10 करोड़ 76 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन (ट्रांजैक्शन) किया जा चुका है।
यही नहीं, इन खातों का नेटवर्क इतना बड़ा है कि इनके खिलाफ देश के 17 अलग-अलग राज्यों में 88 साइबर अपराध की शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से भी इन आरोपियों के रिकॉर्ड साझा कर रही है।
हर तरीके के फ्रॉड में माहिर था यह गिरोह
पूछताछ में पता चला है कि यह केवल डिजिटल अरेस्ट तक सीमित नहीं थे, बल्कि इनके पास लोगों को ठगने के कई और अचूक तरीके थे। यह गिरोह निम्नलिखित माध्यमों से लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाता था:
लिंक फ्रॉड और शेयर ट्रेडिंग स्कैम
YONO APK (फर्जी बैंकिंग ऐप) और पार्ट टाइम जॉब फ्रॉड
क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग और फिशिंग लॉटरी
आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान चोरी) और सिम स्वैपिंग
OTP शेयरिंग, OLX फ्रॉड और फर्जी होटल बुकिंग
केस बैकग्राउंड: मनी लॉन्ड्रिंग की धमकी और खौफ का वो 'डिजिटल अरेस्ट'
यह पूरा मामला रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर सपन कुमार को कुछ अज्ञात नंबरों से फोन आया था। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई और क्राइम ब्रांच का बड़ा अधिकारी बताया। उन्होंने डॉक्टर पर मानसिक दबाव बनाते हुए कहा:
"आपके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और देश विरोधी गतिविधियों में हुआ है। आपके खिलाफ गैर-जमानती वारंट है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, आप हमारे 'डिजिटल अरेस्ट' में रहेंगे।"
इसके बाद आरोपियों ने डॉक्टर को स्काइप और व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर लगातार अपनी नजरों के सामने रखा। उन्हें किसी भी परिजन या बाहरी व्यक्ति से बात करने से पूरी तरह रोक दिया गया। जेल जाने और बदनामी के इसी डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने डॉक्टर को सम्मोहित (साइकोलॉजिकल प्रेशर) कर दिया और अलग-अलग किस्तों में 1.25 करोड़ रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
साइबर ट्रेल से खुला राज
पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने विधानसभा थाने में मामला दर्ज कराया। इसके बाद रायपुर आईजी और एसएसपी के निर्देश पर साइबर रेंज की टीम ने टेक्निकल एनालिसिस शुरू किया। बैंक खातों के 'मनी ट्रेल', मोबाइल लोकेशन और आईपी एड्रेस को ट्रैक करते हुए पुलिस पहले हरियाणा पहुंची और अब दिल्ली-कर्नाटक से इस गिरोह की कमर तोड़ दी है।डरें नहीं, सावधान रहें
रायपुर पुलिस ने इस बड़ी कामयाबी के बाद आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है:
कोई डिजिटल अरेस्ट नहीं: कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।
पैसे ट्रांसफर न करें: यदि कोई खुद को जांच अधिकारी बताकर डराए या गुप्त खातों में पैसे भेजने को कहे, तो तुरंत फोन काट दें।
यहाँ करें शिकायत: ऐसे मामलों की तुरंत सूचना अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

