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महिलाओं को  सौगात : जमीन रजिस्ट्री पर 50% छूट, संपत्ति में बढ़ेगा महिला स्वामित्व

छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं के नाम पर संपत्ति रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50% की छूट देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की पहल और वित्त मंत्री O. P. Choudhary के नेतृत्व में लागू इस योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और संपत्ति में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
06 May 2026, 08:59 PM
रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य में यदि किसी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर की जाती है तो उस पर लगने वाले पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस फैसले के लागू होने के साथ ही राज्य में महिलाओं के नाम पर संपत्ति दर्ज कराने को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय की आधिकारिक अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। यह प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी और सशक्त बनेगी। इस निर्णय का उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति का प्रत्यक्ष स्वामी बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

राज्य सरकार के अनुसार, अब अधिक से अधिक परिवार संपत्ति को महिलाओं के नाम पर दर्ज कराने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे महिला स्वामित्व का प्रतिशत तेजी से बढ़ेगा।

सशक्त महिला, सशक्त प्रदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय को राज्य के लिए एक “ऐतिहासिक कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि
“जब महिला संपत्ति की मालिक बनेगी, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह जीवन के हर क्षेत्र में अधिक मजबूत भूमिका निभा सकेगी।”

वित्तीय असर: सरकार का इसे निवेश मानने का दावा

वित्त मंत्री O. P. Choudhary ने इस फैसले को केवल राजस्व छूट नहीं बल्कि एक सामाजिक निवेश बताया है। उनके अनुसार, इस योजना के लागू होने से राज्य सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये के राजस्व का असर झेलना पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार का मानना है कि यह नुकसान नहीं बल्कि दीर्घकालिक लाभ देने वाला निवेश है, क्योंकि इससे समाज में आर्थिक समानता और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।

अधिसूचना में क्या है प्रावधान?

राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार:

  • यदि किसी भी अचल संपत्ति का हस्तांतरण दस्तावेज महिलाओं के पक्ष में निष्पादित किया जाता है
  • तो उस पर लागू सामान्य पंजीयन शुल्क में 50% की छूट दी जाएगी
  • यह छूट सभी पात्र मामलों में तत्काल प्रभाव से लागू होगी

सरल शब्दों में कहें तो अब महिलाओं के नाम पर जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर परिवार को आधा रजिस्ट्रेशन शुल्क ही देना होगा।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में असर की उम्मीद

इस फैसले का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है, जहां अब तक पुरुषों के नाम पर ही अधिकांश संपत्तियां दर्ज होती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस छूट के बाद जमीन-जायदाद के मामलों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ेगी।

शहरी क्षेत्रों में भी यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि अब लोग टैक्स और शुल्क बचाने के लिए महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने की ओर रुख कर सकते हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम

राज्य सरकार पहले भी महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई कदम उठा चुकी है, जिनमें स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा, स्वरोजगार योजनाएं और आर्थिक सहायता कार्यक्रम शामिल हैं। अब यह नई पहल सीधे संपत्ति अधिकार से जुड़ी होने के कारण इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामाजिक बदलाव की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि जब महिलाओं के नाम संपत्ति होगी, तो उन्हें बैंक लोन, वित्तीय योजनाओं और सरकारी सुविधाओं का लाभ भी आसानी से मिलेगा। इससे न केवल उनका सामाजिक दर्जा बढ़ेगा बल्कि परिवार में निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी।

क्या बदल सकता है भविष्य

इस निर्णय के बाद आने वाले वर्षों में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

  • महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन में वृद्धि
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका मजबूत
  • वित्तीय संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना
  • संपत्ति विवादों में संभावित कमी
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