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मालगाड़ी पटरी से उतरी
मालगाड़ी पटरी से उतरी
कोरबा

रेल हादसा टला : कुसमुंडा सायलो साइडिंग में मालगाड़ी का इंजन बेपटरी,  3 घंटे थमा रहा कोयला परिवहन

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की कुसमुंडा सायलो साइडिंग में कोयला लोडिंग के दौरान एक मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया। प्रारंभिक जांच में ट्रैक पर जमा कोयले की मोटी परत को हादसे की वजह माना गया, जिससे इंजन का संतुलन बिगड़ गया और उसके छह पहिए बेपटरी हो गए। लोको पायलट और कर्मचारियों की सतर्कता से कोई जनहानि नहीं हुई। रेलवे की तकनीकी टीम ने करीब तीन घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद क्रेन और हाइड्रोलिक उपकरणों की मदद से इंजन को फिर पटरी पर चढ़ाया।

कीर्तिमान न्यूज
20 May 2026, 10:21 AM
📍 कोरबा

छत्तीसगढ़ के ऊर्जा धानी कहे जाने वाले कोरबा जिले में मंगलवार की शाम एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। कुसमुंडा क्षेत्र स्थित एसईसीएल (SECL) की कुसमुंडा सायलो साइडिंग में कोयला लोडिंग के दौरान एक मालगाड़ी का शक्तिशाली इंजन अचानक पटरी से नीचे उतर गया। इंजन के डिरेल होते ही साइडिंग परिसर में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कुछ समय के लिए कोयले का परिवहन पूरी तरह ठप हो गया।

कैसे और क्यों पटरी से उतरा इंजन

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब मालगाड़ी में कोयला लोड किया जा रहा था। शुरुआती तकनीकी जांच में जो कारण सामने आए हैं, वे प्रबंधन की लापरवाही की ओर भी इशारा करते हैं:

  • पटरी पर जमा कोयले की परत: प्रारंभिक जांच के मुताबिक, सायलो साइडिंग के ट्रैक पर भारी मात्रा में कोयला गिरा हुआ था।

  • संतुलन बिगड़ा: नियमित सफाई न होने के कारण रेल की पटरियों पर कोयले की मोटी परत जम चुकी थी। जैसे ही मालगाड़ी का इंजन वहां से गुजरा, उसके भारी-भरकम पहिए कोयले के ढेर पर चढ़ गए। इससे इंजन का संतुलन बिगड़ गया और उसके छह पहिए (एक पूरा ट्रॉली सेट) ट्रैक से नीचे उतर गए।

त्वरित कार्रवाई: इंजन के बेपटरी होते ही लोको पायलट (चालक) और वहां तैनात रेल कर्मियों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के उच्च अधिकारियों और एसईसीएल (SECL) प्रबंधन को दी।

3 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, क्रेन की मदद से बहाल हुआ ट्रैक

खबर मिलते ही रेलवे की एटीआर (एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन) तकनीकी टीम और क्रेन के साथ मौके पर पहुंची। युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू किया गया।

करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और विशेष हाइड्रोलिक उपकरणों व क्रेन की मदद से इंजन के छह पहियों को वापस सुरक्षित तरीके से पटरी पर लाया गया। ट्रैक की जांच करने और उसे 'फिट' घोषित किए जाने के बाद ही परिचालन दोबारा शुरू हो सका।

क्या पड़ा असर?

  • स्थानीय परिवहन प्रभावित: इस हादसे के कारण कुसमुंडा सायलो साइडिंग के संबंधित ट्रैक पर लगभग तीन से चार घंटे तक कोयला लोडिंग और बंकरों से परिवहन का काम पूरी तरह प्रभावित रहा।

  • मुख्य रेल लाइन सुरक्षित: रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह घटना साइडिंग (लूप लाइन) के अंदर हुई थी, इसलिए बिलासपुर-कोरबा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों के आवागमन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। अन्य मार्गों से यात्री ट्रेनें और कोयला गाड़ियां सामान्य रूप से चलती रहीं।

प्रबंधन की जांच शुरू: रेलवे और एसईसीएल के अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। साइडिंग प्रभारी को पटरियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में दोबारा कोयले की वजह से ऐसा कोई गंभीर हादसा न हो।

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