छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में क्रेशर माफियाओं का खूनी खेल और प्रशासनिक शह का एक और दिल दहला देने वाला चेहरा सामने आया है। राजपुर क्षेत्र के भिलाई स्थित 'सिंघल गिट्टी क्रेशर' में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम कराने के कारण एक २० वर्षीय सीधे-साधे आदिवासी मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जिले में क्रेशर संचालकों के लिए मजदूरों की जिंदगी की कीमत चंद रुपयों से ज्यादा नहीं है।
घटना रविवार की है। बरगीडीह गांव का रहने वाला २० वर्षीय अलमोन उरांव (उरांव जनजाति) रोज की तरह भिलाई स्थित सिंघल गिट्टी क्रेशर पर मजदूरी करने गया था। उसे क्रेशर के 'झरना' (वाइब्रेटर/छन्नी) के भीतर घुसकर सफाई करने के काम पर लगाया गया।
लापरवाही की हद: नियमों के मुताबिक ऐसे खतरनाक हिस्सों की सफाई के वक्त क्रेशर पूरी तरह बंद और लॉक होना चाहिए, साथ ही मजदूर के पास हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और बूट्स होने अनिवार्य हैं। लेकिन अलमोन को कोई भी सेफ्टी गियर (सुरक्षा उपकरण) नहीं दिया गया था।
सफाई के दौरान अचानक ऊपर लगा डेढ़ क्विंटल (150 KG) वजनी लोहे का कीप (फनल) टूटकर सीधे अलमोन के ऊपर आ गिरा। भारी-भरकम लोहे के नीचे दबने से अलमोन मौके पर ही लहूलुहान होकर बेहोश हो गया।
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रसूखदारों के नाम आए सामने
इस मामले में एक बड़ा अपडेट यह सामने आ रहा है कि इस क्रेशर का मालिकाना हक हाल ही में बदला था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार:
इस क्रेशर के मूल मालिक विजय सिंघल ने कुछ महीने पहले इसे बेच दिया था।
वर्तमान में इसका संचालन बलरामपुर जिला क्रेशर संघ के जिला अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल और उनके सहयोगियों द्वारा किए जाने की बात सामने आ रही है।
चूंकि मामला क्रेशर संघ के अध्यक्ष से जुड़ा है, इसलिए पुलिस और प्रशासन पर शुरुआत से ही मामले को दबाने और लीपापोती करने का भारी दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वे इस 'मालिकाना हक' के दावों की सच्चाई की जांच कर रहे हैं।
राजनीतिक रसूख और 'अवैध लेनदेन' का खेल
राजपुर क्षेत्र के बरियों, बघिमा और भिलाई इलाकों में अवैध क्रेशरों और गिट्टी खदानों की बाढ़ आई हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को हर महीने 'मोटा नजराना' (अवैध कमीशन) पहुंचता है, जिसके कारण इन माफियाओं पर कभी आंच नहीं आती। क्रेशर संचालकों की राजनीतिक पहुंच इतनी तगड़ी है कि नियम-कायदे इनके सामने घुटने टेक देते हैं।
पूर्व जनजाति आयोग अध्यक्ष की चेतावनी
इस घटना के बाद आदिवासियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।
भानु प्रताप सिंह के मुख्य आरोप और मांगें:
सिर्फ शोषण: "क्रेशरों में आदिवासी मजदूरों का सिर्फ आर्थिक और शारीरिक शोषण हो रहा है। उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।"
दिखावे की कार्रवाई: "ग्रामीणों की शिकायतों पर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। क्रेशर मालिकों को महज एक नोटिस जारी कर 'क्लीन चिट' दे दी जाती है।"
दोहरी मार: "ये क्रेशर एक तरफ जहरीला प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण और स्थानीय लोगों के फेफड़े खराब कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सेफ्टी न देकर मजदूरों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं।"
चेतावनी: पूर्व अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर जिला प्रशासन ने इस मामले में क्रेशर मालिकों और दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में पूरे जिले में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बड़ा सवाल:
क्या कलेक्टर और एसपी बलरामपुर इस बार क्रेशर संघ के रसूखदार अध्यक्ष और मालिकों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की हिम्मत दिखा पाएंगे? या एक गरीब आदिवासी की मौत हमेशा की तरह फाइलों में दफन हो जाएगी?

