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अनिरूद्धाचार्य का वृंदावन में कथा
अनिरूद्धाचार्य का वृंदावन में कथा
धर्म /ज्योतिष

वृंदावन में अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज : दिव्य सत्संग जारी, भजन-कीर्तन और प्रवचनों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज का दिव्य सत्संग वृंदावन स्थित गौरी गोपाल आश्रम में जारी है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण भजन, राधे-राधे संकीर्तन, हरिनाम जाप और भागवत कथा के साथ महाराज जी ने भक्ति, सेवा, संस्कार और सकारात्मक जीवन का संदेश दिया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
08 May 2026, 03:50 PM
📍 वृन्दावन
अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज वृंदावन स्थित उनके आश्रम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भक्त देश के अलग-अलग हिस्सों से महाराज जी के दर्शन और सत्संग में शामिल होने पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम गौरी गोपाल आश्रम में आयोजित किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन दिव्य प्रश्नोत्तरी, भजन-सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन हो रहा है। महाराज जी अपने सरल और भावनात्मक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश दे रहे हैं।
आश्रम परिसर में भक्ति का माहौल बना हुआ है। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। भक्तों का कहना है कि महाराज जी के सत्संग से उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंच रहे हैं।

श्रीकृष्ण भजन

अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज के सत्संग में सबसे प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भजन होते हैं। इन भजनों में कान्हा की बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोपियों के साथ रासलीला और गीता के संदेशों का भावपूर्ण वर्णन किया जा रहा  है। जब आश्रम में “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम” या “कन्हैया मेरे” जैसे भजन गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। श्रद्धालु ताली और झूमते हुए इन भजनों में शामिल होते हैं।

राधे-राधे संकीर्तन

सत्संग में राधारानी के नाम का संकीर्तन विशेष महत्व रखता है। “राधे-राधे” के जयकारों से आश्रम का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो जाता है। माना जाता है कि वृंदावन में राधारानी का नाम लेने मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। अनिरुद्ध आचार्य जी भी अपने प्रवचनों में राधारानी की कृपा और भक्ति के महत्व को विस्तार से बताते हैं। श्रद्धालु सामूहिक रूप से संकीर्तन में शामिल होकर भक्ति रस में डूब जाते हैं।

भागवत कथा से जुड़े पद

कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत कथा से जुड़े पद और भक्ति गीत भी गाए जाते हैं। इन पदों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, धर्म, कर्म और भक्ति के संदेशों को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। आचार्य जी कथा के साथ इन पदों का अर्थ भी समझाते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक ज्ञान के साथ आध्यात्मिक प्रेरणा भी मिलती है।

हरिनाम संकीर्तन

हरिनाम संकीर्तन सत्संग का सबसे ऊर्जावान हिस्सा है। इसमें श्रद्धालु सामूहिक रूप से “हरे कृष्ण हरे राम” और अन्य मंत्रों का जाप किया जा रहा हैं। ढोलक, मंजीरा और झांझ की धुन पर पूरा आश्रम भक्ति में डूब जाता है। माना जाता है कि हरिनाम संकीर्तन से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

भक्तिमय भजन और झांकियां

सत्संग के दौरान कई बार भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की सुंदर झांकियां भी सजाई जाती हैं। रंग-बिरंगे फूलों, दीपों और पारंपरिक सजावट के बीच भजन प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे वातावरण और भी दिव्य बन जाता है। श्रद्धालु इन झांकियों के दर्शन कर खुद को वृंदावन की भक्ति परंपरा से जुड़ा महसूस करते हैं।

भक्ति का संदेश

अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी ताकत भगवान के प्रति सच्ची भक्ति है। उन्होंने बताया कि जब इंसान सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, तो उसके जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। महाराज जी ने कहा कि भक्ति केवल मंदिर जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर काम को ईश्वर को समर्पित भावना से करना ही असली भक्ति है।

सेवा का महत्व

महाराज जी ने कहा कि जरूरतमंदों की मदद करना और दूसरों के दुख को समझना सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गरीबों, बुजुर्गों और असहाय लोगों की सेवा करने की अपील की। उनके अनुसार, जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, उसे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि सेवा से मनुष्य के भीतर विनम्रता और सकारात्मकता बढ़ती है।

संस्कार और परिवार

प्रवचन के दौरान उन्होंने परिवार और संस्कारों की अहमियत पर भी जोर दिया। महाराज जी ने कहा कि माता-पिता का सम्मान और बड़ों का आदर करना भारतीय संस्कृति की पहचान है। उन्होंने युवाओं से कहा कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने के साथ-साथ अपने संस्कारों और परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए।

क्रोध और अहंकार से दूर रहने की सीख

महाराज जी ने कहा कि क्रोध, लालच और अहंकार इंसान को अंदर से कमजोर बना देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को धैर्य और प्रेम का मार्ग अपनाने की सलाह दी। उनके अनुसार, जो व्यक्ति अपने मन को शांत रखता है और दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार करता है, वही सच्चे अर्थों में सफल होता है।

नाम-स्मरण और सत्संग का महत्व

उन्होंने बताया कि भगवान का नाम जपने और सत्संग में शामिल होने से मन को शांति मिलती है। महाराज जी ने कहा कि सत्संग मनुष्य को नकारात्मक सोच से दूर कर सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके सत्संग में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
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