📅 Thursday, 07 May 2026 भारत
ब्रेकिंग
लखनऊ बनाम  बेंगलुरु हाई-वोल्टेज मुकाबला : प्लेऑफ की रेस में अहम भिड़ंत, फैंस को रोमांचक जंग की उम्मीद माफियाओं का कहर : पांगन नदी का सीना चीर रही मशीनें, अवैध रेत उत्खनन से ग्रामीणों में भारी आक्रोश चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : राजनीतिक रंजिश, सुपारी किलिंग या व्यक्तिगत दुश्मनी? कई एंगल में जांच  जारी तूफान का कहर : तेज आंधी-बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, घंटों ठप रही बिजली-पानी व्यवस्था लिव-इन रिलेशनशिप : आनंदपुर के जंगलों में पेड़ से लटका मिला युवती का शव 23 लाख की ठगी : मंत्रालय में सरकारी नौकरी के नाम पर झांसा, रायपुरा के बंटी-बबली का कारनामा लखनऊ बनाम  बेंगलुरु हाई-वोल्टेज मुकाबला : प्लेऑफ की रेस में अहम भिड़ंत, फैंस को रोमांचक जंग की उम्मीद माफियाओं का कहर : पांगन नदी का सीना चीर रही मशीनें, अवैध रेत उत्खनन से ग्रामीणों में भारी आक्रोश चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : राजनीतिक रंजिश, सुपारी किलिंग या व्यक्तिगत दुश्मनी? कई एंगल में जांच  जारी तूफान का कहर : तेज आंधी-बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, घंटों ठप रही बिजली-पानी व्यवस्था लिव-इन रिलेशनशिप : आनंदपुर के जंगलों में पेड़ से लटका मिला युवती का शव 23 लाख की ठगी : मंत्रालय में सरकारी नौकरी के नाम पर झांसा, रायपुरा के बंटी-बबली का कारनामा
W 𝕏 f 🔗
होम पर्यटन/यात्रा तुंगनाथ धाम : बादलों के बीच बसा वह दिव्य स्थान जह…
तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर
पर्यटन/यात्रा ⭐ Featured

तुंगनाथ धाम : बादलों के बीच बसा वह दिव्य स्थान जहाँ प्रकट हुई थीं महादेव की भुजाएं

Tungnath Temple उत्तराखंड के हिमालय में स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र और ऊँचाई पर स्थित मंदिर है, जो लगभग 3,680 मीटर की ऊँचाई पर है। इसे पंच केदार में तीसरा केदार माना जाता है और यह विश्व के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज की थी। शिवजी ने बैल का रूप धारण किया और उनके शरीर के विभिन्न भाग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए, जिनमें तुंगनाथ में उनकी भुजाएँ (हाथ) प्रकट हुई थीं। इसके साथ ही इस स्थान का संबंध रामायण काल की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है और पास स्थित Chandrashila को भगवान राम के ध्यान स्थल के रूप में भी माना जाता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
07 May 2026, 12:27 PM
📍 उत्तराखंड

देवभूमि उत्तराखंड की गोद में स्थित तुंगनाथ मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक ऐसा अद्भुत संगम है जो दुनिया को अचंभित कर देता है। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर 'विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर' के रूप में विख्यात है। पंच केदारों में से एक, तुंगनाथ की महिमा का वर्णन पुराणों में विस्तार से मिलता है।

पांडवों और महादेव की अद्भुत कथा

तुंगनाथ के अस्तित्व की कहानी महाभारत के उस कालखंड से जुड़ी है जब पांडव कुरुक्षेत्र युद्ध में हुए रक्तपात और 'भ्राता वध' के पाप से मुक्ति चाहते थे। ऋषि व्यास की सलाह पर वे भगवान शिव की शरण में हिमालय पहुंचे।

महादेव पांडवों से रुष्ट थे और उन्होंने बैल का रूप धारण कर लिया। जब भीम ने उन्हें पहचान लिया, तो शिवजी धरती में समाने लगे। इस प्रक्रिया में उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंच केदार कहा जाता है:

  • तुंगनाथ: यहाँ भगवान शिव की भुजाएं (हाथ) प्रकट हुई थीं।

  • केदारनाथ: जहाँ उनका कूबड़ (पीठ का भाग) दिखा।

  • मदमहेश्वर: जहाँ नाभि के दर्शन हुए।

  • रुद्रनाथ: जहाँ मुख प्रकट हुआ।

  • कल्पेश्वर: जहाँ उनकी जटाएं दिखाई दीं।

मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं अर्जुन ने करवाया था ताकि पांडव अपने पापों का प्रायश्चित कर सकें।

रामायण काल से गहरा नाता

तुंगनाथ का महत्व केवल महाभारत तक सीमित नहीं है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण ने भी इसी स्थान पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। वहीं, रावण वध के बाद ब्रह्म-हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम ने तुंगनाथ से कुछ दूरी पर स्थित 'चंद्रशिला' की चोटी पर ध्यान लगाया था।

आध्यात्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग

तुंगनाथ केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि प्रकृति की सुंदरता और दिव्य ऊर्जा का केंद्र है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह मंदिर सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद रहता है और गर्मियों में श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।

विशेष मान्यता: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो भक्त केदारनाथ के साथ-साथ पंच केदार के दर्शन कर लेता है, उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यदि आप हिमालय की शांत चोटियों के बीच महादेव की असीम कृपा और मानसिक शांति की तलाश में हैं, तो तुंगनाथ से बेहतर कोई दूसरा स्थान नहीं है। यहाँ की हवाओं में आज भी पांडवों की भक्ति और महादेव की शक्ति का वास महसूस किया जा सकता है।

📱 हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
सरकारी सूचना राजनीति अतिथि
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश विदेश मनोरंजन/फैशन शिक्षा/करियर सेहत खेल कारोबार पर्यटन/यात्रा धर्म /ज्योतिष राशिफल 🌙 डार्क/लाइट मोड ✍️ डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
🎬
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

⚠️
सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
🔔
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें