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छत्तीसगढ़ में घुमने की खास स्थान
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झरने, गुफाएं, मंदिर और जंगल... कुदरत और संस्कृति का अनूठा संगम, छत्तीसगढ़ के 10 दर्शनीय स्थल

छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों का अनोखा संगम है। चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, तीरथगढ़, कुटुंबसर गुफाएं, सिरपुर, भोरमदेव मंदिर, बारनवापारा अभयारण्य, डोंगरगढ़, गंगरेल बांध और बारसूर-दंतेश्वरी मंदिर राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जो हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 25 Jul 2026, 12:03 PM · अपडेट: 26 Oct 2026, 04:24 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
मध्य भारत का दिल कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ अपनी घनी वादियों, गरजते झरनों, प्राचीन धरोहरों और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है। अगर आप रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर प्रकृति के करीब जाना चाहते हैं या इतिहास को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ की ये 10 जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर होनी चाहिए।

चित्रकोट जलप्रपात
चित्रकोट जलप्रपात : भारत का 'नियाग्रा 

बस्तर ज़िले में इंद्रावती नदी पर स्थित यह विशाल जलप्रपात देश के सबसे चौड़े झरनों में गिना जाता है। लगभग 90 फीट की ऊँचाई से गिरती पानी की विशाल धारा और आसपास फैली हरियाली का दृश्य देखने लायक होता है। मानसून और ठंड के दिनों में यहाँ पर्यटकों की अच्छी-खासी चहल-पहल रहती है।

मैनपाट
मैनपाट : छत्तीसगढ़ का शिमला 

समुद्र तल से करीब 3500 फीट की ऊँचाई पर बसा मैनपाट अपने ठंडे मौसम और ढलानदार वादियों के लिए प्रसिद्ध है। इसे 'छत्तीसगढ़ का शिमला' और 'मिनी तिब्बत' भी कहा जाता है। यहाँ का 'दलदली पॉइंट' (जहाँ की ज़मीन स्पंज की तरह उछलती है), उल्टा पानी और तिब्बती मठ सैलानियों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं।

तीरथगढ़ जलप्रपात
तीरथगढ़ जलप्रपात : दूधिया पानी का जादू

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित तीरथगढ़ झरना अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाता है। यहाँ मुनगा बहार नदी का पानी चट्टानों की सीढ़ियों से होकर नीचे गिरता है, जिससे पानी पूरी तरह दूध की तरह सफेद दिखाई देता है। परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए यह एक मुफ़ीद जगह है।

कुटुंबसर गुफाएँ
कुटुंबसर गुफाएँ : कुदरत का अजूबा 

अगर आपको थ्रिल और एडवेंचर पसंद है, तो कांगेर घाटी की कुटुंबसर गुफाएँ ज़रूर देखें। चूना पत्थरों से प्राकृतिक रूप से बनी ये गुफाएँ ज़मीन के अंदर काफी गहराई तक जाती हैं। गुफा के अंदर मौजूद अजीबोगरीब आकृतियाँ (स्टैलेग्माइट्स और स्टैलेक्टाइट्स) और आँखों से रहित अंधी मछलियाँ यहाँ का मुख्य आकर्षण हैं।

सिरपुर
सिरपुर : इतिहास प्रेमियों की पहली पसंद 

महानदी के तट पर बसा सिरपुर बौद्ध, जैन और हिंदू संस्कृति का एक बड़ा पुरातात्विक केंद्र है। यहाँ का 'लक्ष्मण मंदिर' ईंटों से बनी वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। खुदाई में मिले प्राचीन विहार और मंदिर इतिहास के कई सुनहरे पन्नों को बयां करते हैं।

भोरमदेव मंदिर
भोरमदेव मंदिर : छत्तीसगढ़ का खजुराहो 

मैकाल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और नागर शैली की वास्तुकला के लिए मशहूर है। 11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर परिसर की दीवारों पर उकेरी गई आकृतियों की वजह से इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है।

बारनवापारा अभयारण्य
बारनवापारा अभयारण्य : वाइल्डलाइफ प्रेमियों का ठिकाना 

राजधानी रायपुर के करीब स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य हरे-भरे जंगलों और हिरण, चीतल, नीलगाय व तेंदुए जैसे जानवरों के लिए जाना जाता है। अगर आप शांत माहौल में जंगल सफारी का मज़ा लेना चाहते हैं, तो यह जगह परफेक्ट ऑप्शन है।

डोंगरगढ़
डोंगरगढ़ : आस्था का केंद्र माँ बमलेश्वरी धाम 

ऊँची पहाड़ी पर स्थित माँ बमलेश्वरी देवी का मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। पहाड़ी की चोटी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों के साथ-साथ रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। नवरात्रि के दौरान यहाँ देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

गंगरेल बांध
गंगरेल बांध : वॉटर स्पोर्ट्स और मिनी गोवा का फील 

धमतरी ज़िले में महानदी पर बना गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) पर्यटकों के बीच वॉटर स्पोर्ट्स के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहाँ बोटिंग, जेट स्की और वाटर सर्फिंग के साथ-साथ कॉटेज में ठहरने की भी बेहतरीन व्यवस्था है।

बारसूर और दंतेश्वरी मंदिर
बारसूर और दंतेश्वरी मंदिर : प्राचीन शिल्प और जनआस्था 

दंतेवाड़ा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ दंतेश्वरी मंदिर और पास ही बसा ऐतिहासिक गांव 'बारसूर' अपनी वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। बारसूर में स्थित बत्तीसा मंदिर, मामा-भांजा मंदिर और विशाल गणेश प्रतिमाएँ प्राचीन कला का अनोखा उदाहरण पेश करती हैं।
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