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शिक्षा/करियर

साइबर सिक्योरिटी : 9वीं से 12वीं तक की क्लास के बच्चों के लिए परीक्षा अनिवार्य

सरकार स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सुरक्षा की ट्रेनिंग देने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और ऑनलाइन गेमिंग की लत से बचाना है। शुरुआत में 500 स्कूलों में यह कार्यक्रम लागू होगा, जहां स्मार्ट टीवी और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। छात्रों को सालभर में लगभग 40 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें फिशिंग, फेक ऐप, सोशल मीडिया प्राइवेसी और साइबर अपराध से बचाव की जानकारी शामिल होगी। इस अभियान में साइबर पुलिस भी सहयोग करेगी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कोर्स के अंत में परीक्षा भी होगी, लेकिन उसके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाएंगे।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
08 May 2026, 01:03 PM
📍 मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश सरकार अब स्कूली छात्रों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सुरक्षा की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं और जल्द ही चयनित स्कूलों में यह कार्यक्रम लागू किया जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और ऑनलाइन गेमिंग की लत से बचाना है। वर्तमान समय में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण साइबर अपराध के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। खासतौर पर स्कूली बच्चे और युवा आसानी से साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।

500 स्कूलों में होगी शुरुआत

शुरुआती चरण में राज्य के 500 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्कूलों में स्मार्ट टीवी लगाए जा चुके हैं और डिजिटल क्लास के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी। शिक्षा विभाग राज्य ओपन बोर्ड के सहयोग से इस कार्यक्रम का ड्राफ्ट और पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है।

छात्रों को मिलेगी 40 घंटे की ट्रेनिंग

छात्रों को सालभर में लगभग 40 घंटे की साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें सोशल मीडिया प्राइवेसी, फिशिंग, फेक ऐप, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा स्कूलों में साल में दो से तीन बार सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

साइबर पुलिस भी करेगी सहयोग

इस अभियान में साइबर पुलिस की भी मदद ली जाएगी। पुलिस अधिकारी छात्रों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों और उनसे बचने के उपायों की जानकारी देंगे। इससे बच्चों को वास्तविक उदाहरणों के जरिए डिजिटल सुरक्षा को समझने में मदद मिलेगी।

परीक्षा भी होगी आयोजित

कोर्स पूरा होने के बाद विद्यार्थियों की परीक्षा भी ली जाएगी, हालांकि इसके अंक मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किए जाएंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल छात्रों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाने में मददगार साबित होगी।

बढ़ते साइबर अपराध बने चिंता का कारण

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2025 में राज्य में 6 अरब रुपये से अधिक की साइबर ठगी दर्ज की गई। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय रहते जागरूक बनाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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