भारतीय सनातन
परंपरा में हर पर्व के पीछे एक गहरी आस्था और जीवन दर्शन जुड़ा होता है। ऐसा ही एक
पवित्र पर्व है सीता नवमी,
जिसे माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के
साथ मनाया जाता है। इस दिन को जानकी जयंती भी कहा जाता है, जो
नारी शक्ति, त्याग और मर्यादा की प्रतीक माता सीता के जीवन
को स्मरण करने का अवसर देता है।
पौराणिक
मान्यताओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब खेत में हल चला रहे थे, तब
धरती से एक दिव्य कलश प्रकट हुआ, जिसमें से एक कन्या का जन्म
हुआ, वही कन्या थीं माता सीता। धरती से उत्पन्न होने के कारण उन्हें भूमिजा कहा गया,
वहीं जनक की पुत्री होने के कारण वे जनकनंदिनी के नाम से भी विख्यात
हुईं। उनका जीवन त्याग, धैर्य और आदर्श नारीत्व का अनुपम
उदाहरण प्रस्तुत करता है।
वर्ष 2026 में वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख
कृष्ण नवमी तिथि 24 अप्रैल, शुक्रवार
की शाम 7:22 बजे से प्रारंभ होकर 25 अप्रैल,
शनिवार को शाम 6:29 बजे तक रहेगी। हिंदू
परंपरा में सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि को श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए इस वर्ष सीता नवमी 25 अप्रैल 2026,
शनिवार को मनाई जाएगी।
इस दिन
विवाहित महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखती हैं और माता सीता तथा भगवान श्रीराम की
विधिपूर्वक पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में
सुख-शांति आती है, पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। पूजा में घर
को स्वच्छ कर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित की जाती है, पुष्प, फल, धूप-दीप अर्पित कर
रामायण के अंशों का पाठ किया जाता है।

