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धर्म
शिव भक्ति : सरल मार्ग बता रहे पंडित प्रदीप मिश्रा, कांके मैदान में उमड़ा जनसैलाब
कांके फुटबॉल मैदान में पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा श्री शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन चल रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक हो रही है। इसमें शिव भक्ति, कर्म, सरल जीवन, सेवा भाव और जीवन में संतुलन का संदेश दिया जा रहा है। श्रद्धालु इसे स्थल पर और यूट्यूब लाइव के माध्यम से भी सुन रहे हैं।
धर्म
प्रवचन : बागेश्वर धाम सरकार ने भक्ति, संस्कार और सनातन धर्म पर दिया संदेश, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मुंबई में Dhirendra Krishna Shastri (बागेश्वर धाम सरकार) के धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। 4 मई 2026 को हुए आयोजन में बालाजी आरती और दिव्य दर्शन के साथ प्रवचन दिए गए, जिनमें सनातन धर्म, भक्ति, संस्कार और सकारात्मक जीवन पर जोर रहा। उन्होंने श्रीराम और हनुमान भक्ति, राम नाम जप और हनुमान चालीसा को मानसिक शांति का साधन बताया। साथ ही परिवार, माता-पिता के सम्मान और अच्छे संस्कारों को समाज की मजबूती का आधार कहा। प्रवचन में युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक रहने और अंधविश्वास से बचकर विश्वास व कर्म पर ध्यान देने की सीख दी गई।
धर्म
धर्म आडंबर नहीं, जीवन का व्यवहार है—पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण कथा में दिया मानवता और सेवा का संदेश
सीहोर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने धर्म को केवल पूजा-पाठ या बाहरी आडंबर तक सीमित न मानकर उसे जीवन के व्यवहार और कर्मों में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वही है जो व्यक्ति को सत्य, करुणा, सेवा और ईमानदारी की ओर ले जाए। उन्होंने समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे को धर्म का वास्तविक उद्देश्य बताया और कर्मों को सबसे बड़ी पूजा कहा। साथ ही मन की शुद्धता, सकारात्मक सोच और अहंकार-ईर्ष्या के त्याग पर बल दिया।
धर्म
श्रीमद्भागवत कथा: कृष्ण जन्म, गोवर्धन लीला और कंस वध प्रसंगों से भक्त हुए भावविभोर
बिरकोनी स्थित आदर्श ग्राम बरबसपुर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे और पांचवे दिन कथाव्यास पंडित रूपनारायण शर्मा जी ने समुद्र मंथन, श्रीकृष्ण जन्म, बाल लीलाएँ, गोवर्धन पर्वत धारण और कंस वध जैसे प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
धर्म
मुचुकुंद उद्धार व रुक्मणी विवाह प्रसंग से श्रद्धालु हुए भावविभोर
ग्राम लभराखुर्द में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक पं. सूर्यकांत शास्त्री ने महारास, मुचुकुंद उद्धार और रुक्मणी मंगल विवाह प्रसंग का वर्णन किया।