पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में लगातार हो रहे इजरायली हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ताजा हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बेका और बिंत जुबैल जैसे इलाकों में रातभर विस्फोटों की गूंज सुनाई देती रही, जबकि हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़ने को मजबूर हो गए। लगातार जारी बमबारी के कारण आम नागरिकों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है और दक्षिणी लेबनान धीरे-धीरे एक बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायली सेना द्वारा हमलों से पहले सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी जारी की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पास सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन नहीं थे। कई इलाकों में मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और अस्पतालों पर घायलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, लाखों लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं और हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल सीमावर्ती सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। Israel और Hezbollah के बीच बढ़ता टकराव क्षेत्र को व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को संभाल पाएंगे या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध का गवाह बनेगा। लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में एक बार फिर इजरायली हवाई हमलों ने तबाही मचाई है। ताजा हमलों में छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। पश्चिम बेका क्षेत्र के सहमार कस्बे पर हुए हमले के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घायलों को तटीय शहर टायर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि कई इलाकों में लोगों का पलायन लगातार जारी है।
लगातार हमलों से बढ़ा मानवीय संकट
इजरायल की ओर से दक्षिणी लेबनान में लगातार सैन्य कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले से पहले सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इलाके खाली करने की चेतावनी दी गई थी। इसके कुछ ही घंटों बाद युद्धक विमानों ने सहमार कस्बे को निशाना बनाया। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के बिंत जुबैल क्षेत्र में भी कई मकानों को ध्वस्त किया। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों का कहना है कि लगातार बमबारी की वजह से आम नागरिकों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल, सड़कें और बुनियादी ढांचा लगातार निशाने पर हैं।संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इजरायली हमलों और सैन्य अभियानों के कारण अब तक 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। कई परिवार अस्थायी शिविरों और राहत केंद्रों में रहने को मजबूर हैं।
दशकों पुराना संघर्ष
लेबनान-इजरायल संघर्ष कोई नया विवाद नहीं है। इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कई दशकों से चला आ रहा है। 1982 में इजरायल ने लेबनान में बड़ा सैन्य अभियान चलाया था, जिसके बाद से सीमा क्षेत्रों में लगातार टकराव होता रहा है।दक्षिणी लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष ने कई बार पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया। 2006 का युद्ध इस संघर्ष का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी।विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा युद्ध के बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि लेबनान और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इन हमलों को मानवीय संकट को बढ़ाने वाला बता रहे हैं।
क्या मध्य पूर्व बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। यदि संघर्ष और तेज हुआ, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में लेबनान को केवल सैन्य संकट ही नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में विस्थापन, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ी
यूनाइटेड नेशन लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में भोजन, दवाइयां और अस्थायी आश्रय पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि लगातार हमलों और असुरक्षा के कारण राहत कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो लेबनान और पूरे मध्य पूर्व में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।
