मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक अहम और चौंकाने वाला सुराग हाथ लगा है, जिसने पूरे मामले की जांच को एक नई दिशा दे दी है। जांच में सामने आया है कि अपराधियों ने वारदात के बाद फरार होने के दौरान जिस वाहन का इस्तेमाल किया, उसने बाली टोल ब्रिज पार करते समय यूपीआई (UPI) के जरिए टोल भुगतान किया था। इस डिजिटल ट्रांजैक्शन को अब जांच एजेंसियां सबसे महत्वपूर्ण सुराग मान रही हैं, क्योंकि इसी के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
डिजिटल क्लू
जांच अधिकारियों के अनुसार, टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट और ट्रांजैक्शन आईडी की बारीकी से जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इसी डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए अपराधियों की पहचान और उनके नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि भुगतान किस मोबाइल डिवाइस से किया गया था और उस समय लोकेशन डेटा क्या था। यह पूरा डिजिटल ट्रेल जांच का सबसे मजबूत आधार बनता जा रहा है।
फरार होने की तैयारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों ने वारदात से पहले ही फरार होने की पूरी योजना तैयार कर रखी थी। हत्या के बाद वे तेज रफ्तार वाहन से इलाके से निकल गए और कुछ ही मिनटों में मुख्य सड़क मार्ग से बाहर हो गए।जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे ऑपरेशन में एक से अधिक लोग शामिल थे और यह एक सुनियोजित हमला हो सकता है।तीन संदिग्ध हिरासत में,
इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी की भी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन अभी तक मुख्य आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
पुलिस प्रशासन पर दबाव
घटना को तीन दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इससे पुलिस और जांच एजेंसियों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।
CCTV फुटेज
जांच में अब सबसे बड़ी बाधा CCTV फुटेज की कमी बनकर सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोहारिया–माठपाड़ा इलाके से गुजरने वाले कई महत्वपूर्ण मार्गों पर लगे कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं या उनकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। इस वजह से अपराधियों के फरार होने के रूट को ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अपराधियों ने जानबूझकर ऐसे रास्तों का चयन किया जहां निगरानी कम थी और अंधेरे का फायदा उठाया जा सके।
जांच में जुटी फॉरेंसिक
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में विशेष जांच टीम (SIT) अब पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक **डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक पर भी तेजी से काम कर रही है। जांच एजेंसियां ऐसे तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही हैं, जिनकी मदद से अपराधियों की गतिविधियों, उनके मूवमेंट और पूरी साजिश का स्पष्ट खुलासा किया जा सके।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में टोल प्लाजा का यूपीआई ट्रांजैक्शन डेटा शामिल है, जिसके जरिए मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट और डिजिटल पेमेंट से जुड़े अहम सुराग जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन की लोकेशन हिस्ट्री का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय और उसके बाद अपराधियों की मूवमेंट कहां-कहां रही। SIT टीम बैंक और अन्य डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड की भी गहन जांच कर रही है, जिससे संदिग्ध खातों और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके। साथ ही आसपास के क्षेत्रों के उपलब्ध CCTV फुटेज को भी बारीकी से देखा जा रहा है, ताकि वाहन की गतिविधियों और आरोपियों की पहचान से जुड़ी अहम जानकारी मिल सके।
इसके अलावा, जांच में वाहन के रूट का तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है, जिससे फरारी के पूरे मार्ग की डिजिटल मैपिंग तैयार की जा सके। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़ा जाए, तो अपराधियों तक पहुंचने की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकती है और मामले का जल्द खुलासा संभव है।
