अलर्ट, दुनिया इस समय केवल युद्ध और राजनीतिक तनावों से ही नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी वायरस के खतरे से भी चिंतित है। ऐंटार्कटिका की सैर पर निकले लक्ज़री क्रूज़ शिप ‘MV हॉन्डियस’ में फैले संभावित हंटावायरस संक्रमण ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जहाज़ पर सवार यात्रियों में अचानक बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण सामने आने के बाद हालात गंभीर हो गए।
जानकारी के अनुसार, यह क्रूज़ शिप 1 अप्रैल
को अर्जेंटीना के उशुआइया बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज़ में 88 पर्यटक और चालक दल सहित कुल 147 लोग सवार थे,
जो 23 देशों से आए थे। यात्रियों को
ऐंटार्कटिका, फॉकलैंड द्वीप, साउथ
जॉर्जिया और त्रिस्तान दा कुन्या जैसे दुनिया के सबसे दूरस्थ और बर्फीले क्षेत्रों
की सैर कराई जानी थी।
यात्रा के दौरान 6 अप्रैल को नेदरलैंड्स के 70 वर्षीय एक यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार, सिरदर्द और पेट संबंधी समस्या हुई। जहाज़ पर मौजूद मेडिकल टीम ने इलाज
शुरू किया, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी सांस लेने में गंभीर
दिक्कत शुरू हो गई। 11 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। इसके बाद
जहाज़ पर कई अन्य यात्रियों में भी समान लक्षण दिखाई देने लगे, जिससे दहशत फैल गई।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि संक्रमण ‘ऐंडीज़
हंटावायरस’ का हो सकता है। यह वायरस सामान्यतः संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार के
संपर्क से फैलता है। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला यह वायरस
बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि दुर्लभ मामलों में यह
इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे
गंभीरता से ले रही हैं।
बताया जा रहा है कि जहाज़ के कुछ यात्री बीच यात्रा में
ही अलग-अलग देशों के बंदरगाहों पर उतरकर अपने घर लौट चुके हैं। इसके बाद विश्व
स्वास्थ्य संगठन (WHO)
और कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों ने संभावित संक्रमित यात्रियों
की पहचान और ट्रैकिंग शुरू कर दी है। यूरोप और दक्षिण अफ्रीका तक अलर्ट जारी होने
की खबरें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद वातावरण वाले क्रूज़ जहाज़ों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से बड़े पैमाने पर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। ऐंटार्कटिका जैसे संवेदनशील और पृथक क्षेत्र में इस तरह की घटना ने पर्यटन सुरक्षा और जैविक संक्रमण नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
