नर्मदा की लहरों पर सैर-सपाटे का आनंद उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब गुरुवार शाम बरगी डैम में एक क्रूज हादसे का शिकार हो गया। इस हृदयविदारक घटना ने अब तक 9 मासूम जिंदगियों को लील लिया है, जबकि 4 लोग अब भी गहरे पानी में लापता हैं। इस हादसे ने न केवल पर्यटन सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन की खोखली तैयारियों को भी उजागर कर दिया है।
साधनों के अभाव में 'सांसें' ढूंढती टीमें
हादसे के बाद से ही स्टेट डिसास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और नेशनल डिसास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। लेकिन विडंबना देखिए, जहाँ एक-एक पल कीमती है, वहां जवानों को बुनियादी संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। रेस्क्यू के दौरान घटनास्थल पर पर्याप्त रोशनी (सर्च लाइट) की कमी खलती रही, जिसके कारण रात के अंधेरे में डूबे हुए क्रूज की तलाशी लेना लगभग असंभव हो गया।
आबादी 25 लाख, सुरक्षा के लिए सिर्फ 12 जवान
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जबलपुर जैसे बड़े जिले की आबादी लगभग 25 लाख है, जहाँ सुरक्षा मानकों के अनुसार कम से कम 100 से अधिक प्रशिक्षित SDRF जवानों की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि वर्तमान में यहाँ केवल 10 से 12 जवानों के भरोसे पूरा जिला है। संसाधनों से ज्यादा प्रशिक्षित मानव बल की यह कमी रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है।
कबाड़ में तब्दील हो रही नावें
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि आपदा से लड़ने के लिए कागजों पर तो भारी-भरकम इंतजाम हैं, लेकिन धरातल पर सब 'राम भरोसे' है:
मोटरबोट: विभाग के पास कुल 18 मोटरबोट मशीनें दर्ज हैं, जिनमें से केवल 9 चालू हालत में हैं।
बोट की स्थिति: कुल 17 नावों में से सिर्फ 7 ही पानी में उतरने लायक हैं।
स्टोर प्रभारी के अनुसार, विभाग के पास लाइफ जैकेट, ऑक्सीजन सिलेंडर और ड्रिल मशीन जैसे करीब 500 उपकरण मौजूद हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब चलाने वाले हाथ ही नहीं होंगे, तो ये उपकरण किस काम के?
पड़ोसी जिलों से मांगनी पड़ी मदद
गुरुवार शाम जब यह हादसा हुआ, तो स्थानीय स्तर पर महज 12 जवानों ने मोर्चा संभाला। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और अंधेरा गहराया, तब प्रशासन की नींद टूटी। इसके बाद नरसिंहपुर, मंडला, कटनी और सिवनी से अतिरिक्त टीमें बुलाई गईं।
निष्कर्ष: बरगी डैम का यह हादसा एक चेतावनी है। यदि समय रहते सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त नहीं किया गया और जवानों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में ऐसी आपदाएं और भी घातक सिद्ध हो सकती हैं। फिलहाल, लापता 4 लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे पानी में उतर रही हैं।
